ट्रिपलआईटी में चेयरमैन गोल्ड मेडल पाने वाले कानपुर के किदवई नगर निवासी दिव्यांश ओमर। स्रोत:छात्
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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के 21वें दीक्षांत समारोह में 648 विद्यार्थियों को डिग्री के साथ-साथ 22 पदक भी दिए जाएंगे। समारोह 12 सितंबर को परिसर स्थित मुख्य सभागार में आयोजित होगा।
कुल 22 पदक में से 16 संस्थागत पदक और छह एंडोमेंट मेडल हैं। बीटेक आईटी में कानपुर के किदवई नगर निवासी दिव्यांश ओमर ने चेयरमैन गोल्ड मेडल, इंस्टीट्यूट गोल्ड मेडल और डॉ. टीसीएम पिल्लै मेमोरियल गोल्ड मेडल हासिल किया है।
बीटेक ईसीई में कासु साई उषाश्री को इंस्टीट्यूट गोल्ड और मेघा गोयल मेमोरियल गोल्ड मेडल मिला है। आईटी के शाह आर्यन कल्पेशभाई को इंस्टीट्यूट सिल्वर और शशांक वर्मा मेमोरियल गोल्ड मेडल दिया जाएगा।
एमटेक और एमबीए में भी पदक
एमबीए में गोल्ड यश पंत, सिल्वर प्रशांत और ब्रॉन्ज मेघा केसरवानी को मिला है। एमटेक आईटी में मनसा पीजे, उत्कर्ष चौहान और उत्कर्ष कुमार को क्रमश: गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मिला। एमटेक ईसीई में मोहम्मद कैफुद्दीन खान, दीपक जोशी और सुषमा को क्रमश: तीनों पदक दिए जाएंगे। एंडोमेंट मेडल में मनसा महेंद्रू और सृष्टि चक्रवर्ती को भी गोल्ड मेडल मिलेगा। एक एंडोमेंट मेडल की सूची अभी अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया में है।
मेधावी दिव्यांश ओमर से बातचीत
सवाल : तीन गोल्ड मेडल मिलेकी जानकारी होने पर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
जवाब :
इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि पहले नहीं हुई थी लेकिन मेरे अंक अच्छे चल रहे थे, इसलिए उम्मीद थी कि मेडल मिल सकता है। हालांकि, पक्की जानकारी नहीं थी। जब तीन मेडल मिलने की पुष्टि हुई तो काफी खुशी हुई।
सवाल :
चेयरमैन गोल्ड मेडल, इंस्टीट्यूट गोल्ड मेडल और डॉ. टीसीएम पिल्लई मेमोरियल गोल्ड मेडल मिलना आपके लिए कितना खास है?
जवाब :
मेरे लिए यह उपलब्धि बहुत खास है। मैं इसे अपनी इंजीनियरिंग डिग्री की सबसे बड़ी उपलब्धियों में मानता हूं, यहां तक कि अपने प्लेसमेंट से भी ऊपर। इसके पीछे चार साल की लगातार मेहनत है। पहले सेमेस्टर से लेकर आखिरी सेमेस्टर तक हर सेमेस्टर में मेहनत की। शुरुआत में मैंने ईसीई से दाखिला लिया था, बाद में ब्रांच बदलकर आईटी में आया और फिर लगातार अच्छे अंक हासिल करने का प्रयास किया।
सवाल : बीटेक आईटी के दौरान पढ़ाई के लिए आपकी रणनीति क्या रही?
जवाब : मेरी पढ़ाई की रणनीति बहुत सामान्य थी। मैं क्लास में प्रोफेसर जो पढ़ाते थे, उस पर पूरा ध्यान देता था। खास तौर पर यह समझने की कोशिश करता था कि कौन से टॉपिक महत्वपूर्ण हैं और किन पर प्रोफेसर ज्यादा जोर दे रहे हैं। परीक्षा से करीब एक सप्ताह पहले तैयारी तेज कर देता था और प्रॉब्लम सॉल्विंग पर ज्यादा ध्यान देता था।
सवाल :
इस पूरी यात्रा में प्रोफेसरों, माता-पिता और दोस्तों का कितना योगदान रहा?
जवाब :
सभी प्रोफेसरों ने अलग-अलग सेमेस्टर में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खास तौर पर हमारी प्रोजेक्ट हेड प्रो. सोनाली अग्रवाल मैम ने तीसरे और चौथे वर्ष में पूरे प्रोजेक्ट के दौरान हमारा मार्गदर्शन किया। माता-पिता हमेशा सपोर्टिव रहे और पढ़ाई को लेकर लगातार हमारा हौसला बढ़ाते रहे। दोस्तों का भी काफी सहयोग मिला।
सवाल :
अब आप आगे क्या करना चाहते हैं और वर्तमान में कहां काम कर रहे हैं?
जवाब :
मेरा प्लेसमेंट कॉलेज के माध्यम से हैदराबाद स्थित डीई शॉ में हुआ है और मैं वहां सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम कर रहा हूं। आगे का लक्ष्य अभी पूरी तरह तय नहीं है, लेकिन सॉफ्टवेयर और खासकर एआई के क्षेत्र में नई चीजों पर काम करने और रिसर्च करने की इच्छा है।