एनटीए जैसी एजेंसी पर सवाल उठने व उससे उपजे युवाओं के आंदोलन के बाद राज्यों के चयन और भर्ती आयोगों का काम बढ़ गया है। समय पर परीक्षा कराने की चुनौती पहले से थी, अब पेपर लीक और प्रश्नपत्र में किसी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए फूलप्रूफ व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आस-पड़ोस के राज्यों के लोक सेवा आयोग और चयन बोर्ड के सदस्य दूसरे राज्य के पैटर्न को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
किसी राज्य की पिछली परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने का तरीका कामयाब रहा तो दूसरे राज्य के प्रश्नपत्र पर सवाल नहीं उठे। किसी के मूल्यांकन सिस्टम ने परीक्षार्थियों को सवाल उठाने का मौका नहीं दिया तो किसी आयोग ने परीक्षा के तुरंत बाद आंसर-की जारी कर तमाम विवादों को विराम दे दिया। लेकिन, एक मोर्चे पर सफल दिख रही परीक्षा किसी दूसरे फ्रंट पर विवादों में घिर जा रही है। इससे जेन-जी का भरोसा तो टूट रहा है, उनको उस राज्य की सरकारों को घेरने का मौका मिल जा रहा है। झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल तक परीक्षाओं में पारदर्शिता न होने से जेन-जी का गुस्सा फूट चुका है।
इसीलिए उत्तर भारत के राज्यों के आयोग आधिकारिक अथवा अनौपचारिक रूप से उन राज्यों के आयोगों की कार्यप्रणाली समझने में जुट गए हैं, जिनके यहां लगभग एक जैसी भर्तियां होती हैं। परीक्षा पैटर्न भी एक जैसा होता है। आयोगों के सदस्य और अफसर उन परीक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली भी देखने की तैयारी कर रहे हैं, जहां कृत्रिम बुद्धिमता यानी एआई की मदद से मुन्ना भाइयों को पिछले दिनों दबोचा गया था।
तकनीक और मैनुअल काम का तालमेल, ताकि डाटा रहे सुरक्षित
भर्ती परीक्षाओं में एआई, मशीन लर्निंग (एमएल) और अन्य तकनीकों का भर्ती परीक्षाओं में कितना और किस तरह प्रयोग किया जाए, आयोगों में यह विमर्श प्राथमिक स्तर पर हो रहा है। उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग ने पिछले दिनों तकनीक से मॉनिटरिंग कर बड़ी परीक्षा में दूसरे की जगह परीक्षा देने की कोशिश करने वाले कई मुन्ना भाइयों को पुलिस के हवाले किया था। इसी तरह उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल चेकिंग भी कई बोर्ड की प्राथमिकता में आ गया है। इससे आंसर-की परीक्षा के बाद तुरंत देना आसान हो जाएगा। हालांकि, भर्ती आयोग डाटा की सुरक्षा के लिए अपनी परीक्षा तकनीक विकसित करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। साथ ही मॉनिटरिंग के कुछ काम मैनुअल भी किए जा रहे हैं।
मीटिंग पर मीटिंग, भर्ती में न हो देर
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, शिक्षा चयन आयोग और अन्य बोर्ड की भर्तियां लेट न हों, इसके लिए शासन स्तर से लगातार निगरानी हो रही है। विशेष टीईटी और लंबित भर्तियों के लिए शिक्षा चयन आयोग के साथ अवर मुख्य सचिव ने शिक्षा चयन आयोग से कार्ययोजना मांगी है। आयोग और शासन की यह बैठक 21 अगस्त को प्रस्तावित है। इसी तरह सभी विभागों से भर्तियों के लिए अधियाचन अपलोड करने के लिए कहा जा रहा है। इसके लिए शासन और आयोगों के स्तर पर लगातार बैठकों का दौर जारी है।