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गेहूं खरीद- 100 रुपये कमीशन दो तभी बेचो गेहूं... वरना जाओ

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किसानों से गेहूं खरीद में बिचौलिए और दलाल हावी

सरकारी क्रय केंद्रों पर 80 से 100 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन

केस एक- शीशगढ़-धनेटा रोड के गांव मिर्जापुर में दो कमरों के एक मकान में सरकारी गेहूं क्रय केंद्र खुला मिला। क्रय केंद्र प्रभारी नदारद थे। रोड के किनारे पेड़ पर क्रय केंद्र का बैनर टंगा था। तीन कुर्सियां पड़ी थीं। किसान अजय पाल ने बताया कि उनको गेहूं बेचने पर 1840 रुपए प्रति क्विंटल के बदले 100 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन मांगा गया।
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केस दो- मिर्जापुर के किसान धर्मवीर का कहना था कि 30 क्विंटल गेहूं पिकअप से क्रय केंद्र पर भिजवाया था। उसमें क्रय केंद्र प्रभारी ने दाना काला बताकर 60 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से कटौती कर ली। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि यह गेहूं खेत से भिजवाया गया या फिर किसानों से कम कीमत पर खरीदकर सरकारी दरों पर बेचने के लिए भिजवाया गया।
केस तीन- किसान रामेश्वर दयाल का गेहूं सेंटर पर नहीं तोला गया। इनकी पत्नी सोमवती का निजी अस्पताल में इलाज रहा है। गेहूं न बिकने से अस्पताल ने इलाज रोक दिया। इनका आरोप है कि ठेकेदार किसानों से साफ कहते हैं कि एक हजार ट्रांसपोर्ट का खर्चा लगता है। इसलिए गेहूं वह 1700 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा रेट में नहीं खरीद पाएंगे।

मीरगंज/ बरेली। किसानों के नाम पर वोट मांगकर सरकारें भले ही बनती रही हों.. हकीकत नहीं बदली। आढ़ती तो कमीशनखोरी के लिए बदनाम हैं ही, उन सरकारी कर्मचारियों का क्या.. जो खुले आम कहते हैं कि 100 रुपये कमीशन तो देना ही पड़ेगा। बात गेहूं खरीद केंद्रों की हो रही है। गेहूं के रेट 1840 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन शायद ही किसी किसान का गेहूं इस रेट पर खरीदा जाता हो। सरकारी एजेंसियों के ठेकेदार खुलेआम किसानों से 80 से 100 रुपए प्रति क्ंिवटल कमीशन पर ही गेहूं खरीद रहे हैं। जो आनाकानी करता है, उससे कह देते हैं कि गेहूं का दाना काला है। ले जाओ।

अमर उजाला टीम ने रविवार को मीरगंज, नवाबगंज, फरीदपुर, आंवला के कुछ गेहूं क्रय केंद्रों का भ्रमण कर सरकारी गेहूं खरीद की हकीकत जानने की कोशिश की तो हकीकत और ही सामने आई। धनेटा-शीशगढ़ रोड पर दिनरा और मिर्जापुर गांव में दो कमरों के मकान में खुले मैदान में किसान गेहूं तुलवाने के लिए लाइन में खड़े मिले। क्रय केंद्र प्रभारी सुबह से नदारद थे। पेड़ पर क्रय केंद्र का बैनर टंगा था। एक तरफ तीन कुर्सियां पड़ी थीं। क्रय केंद्र पर 50 किलो के गेहूं भरे करीब 1000 बोरे खुले में रखे थे। बताया गया कि कमरों में इतना गेहूं रखा नहीं जा सकता क्योंकि उनका आकार छोटा है। ज्यादा गेहूं आने पर खुले में ही रखना पड़ता है। बरसात होने पर यह भीगकर खराब भी हो सकता है। खुद को किसान बताते हुए एक व्यक्ति ने बताया कि सेंटर इंचार्ज से बातचीत के बाद उसने 30 क्विंटल गेहूं पिकअप से भिजवाया। 60 रुपए तुलवाई के नाम पर ठेकेदार ने काट लिए। फिर कमीशन अलग से मांगा। इनकार करने पर दाना काला बताकर गेहूं खरीदने से इनकार कर दिया। हालांकि यह पता नहीं चला कि गेहूं खेत से लाया गया था या कम कीमत पर किसानों से खरीदकर। सुकली के अजयपाल वर्मा बोले- वह 80 क्विंटल गेहूं सेंटर पर लाए थे। ठेकेदारों ने कह दिया कि अनलोडिंग का प्रति गाड़ी 100 रुपये देना पड़ता है। वह 1700 रुपये क्विंटल से ज्यादा नहीं खरीद पाएंगे। फरीदपुर में बीसलपुर रोड पर आरएफसी का क्रय केंद्र बंद मिला। आंवला में देवचरा, आंवला, बल्लिया, हरदासपुर समेत कई क्रय केंद्रों पर भी गेहूं खरीद में मनमानी की शिकायतें हैं। बिथरी चैनपुर, भोजीपुरा के अलावा नवाबगंज में मंडी स्थल, लाबाखेड़ा, रहमतुल्लापुर और अटंगा क्रय केंद्रों पर भी गेहूं की खरीद में भारी अव्यवस्थाएं हैं। इन क्रय केंद्रों पर 60 से 100 रुपए तक कमीशन मांगने की शिकायतें लगातार आ रही हैं।
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12 किमी दूर बनाया क्रय केंद्र
फतेहगंज पश्चिमी। पूरे मीरगंज तहसील क्षेत्र में इस बार मात्र छह सरकारी गेहूं खरीद केंद्र ही खोले गए हैं। इनमें भी फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक के इकलौते गेहूं क्रय केंद्र को कस्बे से 12 किमी दूर मिर्जापुर में फेंक दिया गया है। जाहिर है कि इलाके के काश्तकार इतनी दूर गेहूं ले जाने के बजाय औने-पौने दामों में आढ़तियों के हाथों बेचने को मजबूर हैं। मीरगंज ब्लाक में नथपुरा, रइयानगला, हुरहुरी में तीन गेहूं क्रय केंद्र हैं। शेरगढ़ विकास क्षेत्र का गेहूं क्रय केंद्र सिमरावां गांव में खोला गया है। एक अन्य गेहूं क्रय केंद्र ककरा खुर्द में है।

‘शिकायत पर मीरगंज में पीसीओ के नथपुरा, रइयानगला और हुरहुरी में मार्केटिंग विभाग के गेहूं क्रय केंद्र पर छापा भी मारा था। लेकिन ऐन मौके पर सभी शिकायतकर्ता मुकर गए। कोई गड़बड़ी की तस्दीक करने नहीं आाया। मिर्जापुर क्रय केंद्र की भी शिकायतें मिली हैं। एक-दो दिन में वहां भी आकस्मिक चेकिंग करूंगा।’
- रोहित यादव एसडीएम मीरगंज

‘चुनाव में व्यस्तता की वजह से शुरूआती दौर में गेहूं खरीद ठीक से नहीं चली, लेकिन अब पूरी तरह सख्ती बरती जा रही है। जिन क्रय केंद्रों की शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। गोदाम प्रभारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
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- रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन
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