पीएमओ पहुंचा सुहासिनी का मामला
0 एपीआई स्कोर के निर्धारण में गड़बड़ी का आरोप
0 एफआरसी निदेशक को भी पत्र भेजकर किए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में शिक्षाशास्त्र विषय में सुहासिनी बाजपेयी को इंटरव्यू के लिए चयनित न किए जाने का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) पहुंच गया है। सुहासिनी ने इस पूरे मामले में पीएमओ से हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही इविवि के एफआरसी निदेशक को भी पत्र भेजकर कुछ विवादित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
सुहासिनी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इविवि में चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। पीएम को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि इविवि ने एपीआई स्कोर से संबंधित किसी प्रकार का विवरण उपलब्ध नहीं कराया है, जिससे सूची में नाम शामिल न किए जाने का कारण स्पष्ट हो सके। इस संबंधित में किसी त्रुटि की आशंका में उन्होंने सूची जारी होने के बाद कुलपति, कुलसचिव और एफआरसी निदेशक को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला। केवल इतना बनाया गया कि कुल एपीआई अंक कितना है, जबकि अभ्यर्थी आवेदन करते वक्त एपीआई की गाइडलाइन देखकर ही अलग-अलग श्रेणी में अंकों का दावा करते हैं।
आवेदन के वक्त जो गाइडलाइन वेबसाइट पर प्रदर्शित की गई थी, इविवि अब उससे मानने को तैयार नहीं है। इविवि प्रशासन यह स्पष्ट करने को भी तैयार नहीं है कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एपीआई की गाइडलाइन क्यों बदली गई। सुहासिनी ने मामले में पीएम से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने एफआरसी निदेशक प्रो. अनुपम दीक्षित को पत्र लिखकर पूछा है कि अभ्यर्थियों के लिए आवेदन में एपीआई अंकों का विवरण देने के लिए दिशा-निर्देश कहां वर्णित थे। इसके अलावा एमफिल दो वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए आठ अंक निर्धारित किए गए हैं। सुहासिनी ने पूछा है कि एमफिल एक वर्ष के पाठ्यक्रम को एपीआई में अंक दिए गए हैं या नहीं। अगर दिए गए हैं तो यह नियमावली की उपेक्षा नहीं है।