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चौड़े स्लीपर से रोके जाएंगे रेल हादसे

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चौड़े स्लीपर से रोके जाएंगे रेल हादसे
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0 एनसीआर समेत तमाम जोनल रेलवे में लगाए जाएंगे नई तकनीक वाले स्लीपर
0 इलाहाबाद छिवकी स्टेशन के पास प्रयोग के तौर पर लगाए गए हैं नए स्लीपर
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। संरक्षा और सुरक्षा के मद्देनजर उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) समेत तमाम जोनल रेलवे के ट्रैक में अब नई तकनीक वाले स्लीपर लगाएं जाएंगे। ताकि स्लीपर की खामियों से होने वाले रेल हादसे में कमी आ सके। रेलवे बोर्ड स्तर पर नई डिजाइन वाले स्लीपर को लगाए जाने की मंजूरी दे दी है। इलाहाबाद के छिवकी रेलवे स्टेशन के पास प्रयोग के तौर पर ये स्लीपर लगाए गए थे। यहां इसका प्रयोग सफल रहा। अब चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले स्लीपर लगाए जाएंगे।
दरअसल, रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की ओर से नए डिजाइन वाले स्लीपर का निर्माण किया गया था। प्रयोग के तौर पर ये स्लीपर इलाहाबाद छिवकी रेलवे स्टेशन के निकट लगाए गए। वर्तमान समय रेलवे ट्रैक पर कंक्रीट के जिन स्लीपरों का उपयोग हो रहा है उसके मुकाबले नई तकनीक वाले स्लीपर उससे 25 फीसदी ज्यादा चौड़े हैं। उसका वजन भी प्रति स्लीपर 340 किलो है, जबकि अभी जो स्लीपर उपयोग में लाए जा रहे हैं उनका वजन 280 किलो है। मौजूदा समय लगे स्लीपर 22.9 टन की क्षमता के हैं, जबकि नए स्लीपर की क्षमता 25 टन की है। यानी कि ये स्लीपर मौजूदा ट्रेनों से अधिक वजन सह सकेंगे। इस बारे में एनसीआर के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल का कहना है कि ट्रायल के रूप में इस तरह के स्लीपर छिवकी में लगाए गए हैं। निश्चित तौर पर पहले के मुकाबले इसकी भार वहन क्षमता भी अधिक है।
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14 साल तक नहीं पड़ेगी मरम्मत की जरूरत
0 पुराने स्लीपर के मुकाबले रेलवे के नए स्लीपर में मरम्मत की जरूरत कम पड़ेगी। अभी तमाम जोनल रेलवे में जो स्लीपर लगे हुए हैं उनकी मरम्मत 10 वर्ष के पहले ही करने की नौबत आ जाती है, जबकि चौड़े स्लीपर की 14 साल तक मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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