हाईकोर्ट ने कहा, पुनर्परीक्षा नहीं है सही विकल्प
0 आयोग की गलती से अभ्यर्थियों को नहीं होना चाहिए नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
पीसीएस प्री परीक्षा 2017 का परिणाम रद्द कर फिर से परीक्षा कराने की मांग नामंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात में सिर्फ याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थी ही राहत पाने के हकदार नहीं है बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों को राहत मिलनी चाहिए, जो प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए थे। क्योंकि यदि आयोग के उत्तर सही होते तो शायद वह भी मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकते थे।
न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि ऐसे समय में जब बेहद कठिन प्रतियोगिता चल रही है, एक-एक अंक का महत्व है। आयोग का दायित्व है कि वह सही आंसर की जारी करे। एक गलत प्रश्न बहुत से अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा सकता है। हम इस बात लेकर सजग हैं किसी भी अभ्यर्थी को आयोग की गलती से नुकसान पहुंचने पाए। पीठ ने सुप्रीमकोर्ट के राजेश कुमार केस का हवाला देकर कहा कि ऐसे ही मामले में सर्वोच्च अदालत ने पुनर्परीक्षा कराने के बजाए पुनर्मूल्यांकन को सही माना है। हाईकोर्ट ने सुनील कुमार केस में फिर से परीक्षा कराने को सही नहीं माना है।
याचिकाओं पर अधिवक्ता मनु खरे, स्वाती अग्रवाल सहित दर्जनों वकीलों ने लंबी बहस की। कहा गया कि आयोग द्वारा जारी उत्तर कुंजी से मिलान करने पर पता चला कि आयोग ने सवालों के गलत जवाब दिए हैं जबकि अभ्यर्थियों द्वारा दिया गया उत्तर सही हैं। यदि इन प्रश्नों को उनको अंक दिए जाते तो याचीगण परीक्षा में सफल हो सकते थे।
पुनर्मूल्यांकन से पड़ेगा यह असर
1- अभ्यर्थियों की मेरिट बदलेगी
2- कई पूर्व में सफल अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे
3- कई पूर्व में असफल अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा दे सकेंगे
4- कट ऑफ मेरिट में बदलाव हो जाएगा