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विश्वविद्यालय देगा अब पीएचडी की डिग्री

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डीफिल की जगह अब पीएचडी की डिग्री देगा विश्वविद्यालय
0 इविवि की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय
0 संकायों की संख्या चार से बढ़ाकर 13 किए जाने का प्रस्ताव पारित
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय अब शोधार्थियों को अब डीफिल की जगह पीएचडी की डिग्री देगा। यह निर्णय तकनीकी कारणों से लिया गया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। साथ ही संकायों की संख्या चार से बढ़ाकर 13 किए जाने समेत कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी फैलोशिप को ऑनलाइन कर दिया है। जेएनयू और इलाहाबाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय को छोड़ बाकी सभी विश्वविद्यालय पीएचडी की डिग्री देते हैं। इविवि से जब डीफिल की उपाधि लिखकर भेजा जाता है तो यूजीसी का सॉफ्टवेयर उसे स्वीकार नहीं करता है। यूजीसी के सामने तीन विकल्प थे। यूजीसी अपना सॉफ्टवेयर बदलवा ले, पीएचडी की डिग्री देने वाले सभी विश्वविद्यालयों को डीफिल की डिग्री देने के लिए कहा जाए या इलाहाबाद विश्वविद्यालय डीफिल की जगह पीएचडी की डिग्री दे।
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सबसे आसान रास्ता यही था कि इविवि पीएचडी की डिग्री जारी करे। बाकी विकल्पों को अपनाए जाने से यूजीसी के साथ दूसरे विश्वविद्यालय भी प्रभावित होते। इसी के मद्देनजर एकेडमिक कौंसिल की बैठक में निर्णय लिया गया कि अब शोधार्थियों को अब डीफिल की जगह पीएचडी की डिग्री दी जाएगी। हालांकि दोनों ही डिग्रियां एक समान हैं, सिर्फ नाम का फर्क है। इसके अलावा इविवि में अकादमिक पुनर्गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। तय हुआ कि संकायों की संख्या चार से बढ़ाकर 13 किए जाने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय के विजिटर यानी राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। विजिटर से अनुमति मिलने के बाद संकायों का गठन किया जाएगा। इनमें पुराने और नए दोनों तरह के विभाग शामिल किए जाएंगे। नए विभागों में रोजगार परक पाठ्यक्रमों को ही तरजीह दी जाएगी।
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‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ की एक पहचान को झटका
जिन विशेषताओं के कारण विश्वविद्यालय की पहचान पूरब के आक्सफोर्ड के रूप में होती थी, उनमें से एक कारण विश्वविद्यालय की ओर से डीफिल की डिग्री प्रदान किया जाना भी था। आक्सफोर्ड विवि के साथ भारत में केवल जेएनयू और इविवि ही हैं, जो डीफिल की डिग्री देते थे।
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नैक ग्रेडिंग की ओर बढ़ा विश्वविद्यालय
- इविवि एकेडमिक कौंसिल की बैठक में नैक ग्रेडिंग के मद्देनजर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। नैक ग्रेडिंग के लिए इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस रिपोर्ट अनिवार्य होती है। कौंसिल की बैठक में इस रिपोर्ट को रखा गया और कौंसिल ने इसे मंजूरी दे दी। इस रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार की टीम यहां निरीक्षण कर सुविधाओं का सत्यापन करेगी और विश्वविद्यालय को नैक ग्रेडिंग में शामिल किया जाएगा।
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कॉलेजों में रिसर्च गाइड के लिए बनी कमेटी
- एकेडमिक कौंसिल की बैठक में इविवि के संघटक कॉलेजों में रिसर्च गाइड बनाए जाने की मंजूरी तो नहीं मिली लेकिन इसके लिए पांच सदस्यीय एक कमेटी का गठन कर दिया गया। यह कमेटी कॉलेजों में जाकर वहां सुविधाओं का जायजा लेगी और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कौंसिल की अगली बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। दरअसल, इस प्रस्ताव पर कुछ सदस्यों को आपत्ति थी। उनका कहना था कि कुछ कॉलेजों में लैब आदि की व्यवस्था ठीक नहीं है। पहले इसमें सुधार होना चाहिए, इसके बाद ही रिसर्च गाइड बनाए जाने पर मंजूरी मिलनी चाहिए।
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राज्यपाल केशरीनाथ को एलएलडी की मानद उपाधि
- एकेडमिक कौंसिल की बैठक में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को डॉक्टर ऑफ लॉ (एलएलडी) की मानद उपाधि दिए जाने का निर्णय लिया गया। हालांकि इससे पहले उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन की ओर से भी राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को यह उपाधि दी जा चुकी है। उन्हें इस साल फरवरी में आयोजित एक समारोह में यह उपाधि दी गई थी, जिसमें वह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।
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