ओवरहेडेड लाइन निर्माण घोटाले में फंसे अभियंताओं से 58 लाख रुपये की रिकवरी कराई जाएगी। इसमें लाइन का फर्जी मापन करने के आरोपी जेई और फर्जी बिल प्रमाणित करने वाले तत्कालीन एई के विभागीय खातों पर 29-29 लाख रुपये की धनराशि रिकवरी के रूप में दर्ज करा दी गई। इस घोटाले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता समेत पांच अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत करने की तैयारी शुरू हो गई है।
मुख्य अभियंता एमसी शर्मा की ओर से इस मामले के जांच अधिकारी अधीक्षण अभियंता एसके पाठक से स्पष्टीकरण तलब किए जाने के बाद शनिवार को दोषियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आरंभ हो गई। 33केवी मऊआइमा से 132 केवी सोरांव उप केंद्र को जोड़ने की परियोजना के तहत ओवरहेडेड लाइन निर्माण में व्यापक गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब ठेका कंपनी फैब्रिकेटेड इंडिया के अनुबंध भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि वास्तविक वित्तीय लिंकेज का पता लगाया जा सके। इस मामले में दोषी पाए गए तत्कालीन सहायक अभियंता सत्यदेव सिंह व अस्थाई कुंभ मंडल से संबद्ध अवर अभियंता महेंद्र कुमार से रिकवरी कराने के लिए धनराशि उनके विभागीय खातों पर चढ़ा दी गई। सत्यदेव मौजूदा समय प्रोन्नति के बाद वाराणसी में अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात हैं। इस घोटाले के सामने आने के बाद विद्युत माध्यमिक कार्य खंड में अन्य लाइनों एवं बिजली घरों की
भी जांच कराई जा रही है। इन दूसरे उपकेंद्रों के निर्माण में भी व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितता कर बिजली विभाग को करोड़ों रुपये का चूना लगाए जाने के संकेत मिले हैं। इस खंड में निर्मित अन्य लाइनों व उप केंद्रों के निरीक्षण में पाया गया है कि या तो खंभों की ग्राउटिंग नहीं की गई है या फिर मानक पूरा नहीं किया गया है। अर्थिंग भी मानक के अनुसार नहीं मिली है। किसी भी खंभे में स्टोन पैड नहीं लगाया गया है।