इलाहाबाद। कानपुर की जलपरी के नाम से विख्यात श्रद्धा शुक्ला के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। वह गंगा में तैराकी के लिए उसी वक्त उतरती हैं, जब कोई घाट आने वाला होता है या आसपास भीड़ होती है। इतना ही नहीं, वह दिन में 80 से 100 किमी की बजाय दो से तीन किमी ही तैराकी करती हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार और वरिष्ठ टीवी पत्रकार विनोद कापड़ी ने इसका दावा किया है। वे जलपरी के अभियान से तीन दिनाें तक जुड़े रहे। इलाहाबाद पहुंचकर उन्होंने प्रेस क्लब में मीडिया के सामने अपनी बात रखी।
उन्होंने बताया कि जलपरी श्रद्धा शुक्ला के कानपुर से वाराणसी तक के अभियान के बारे में समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी हुई। तभी मन में उन पर डॉक्यूमेंटी बनाने की सूझी। वह श्रद्धा के अभियान के साथ रायबरेली से जुड़े। तीन दिनों तक साथ रहे। कहा कि श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला ने पहले दिन से ही मीडिया को भ्रम में रखा। बहाना बनाया कि बच्ची की तबीयत खराब है। इसलिए वह ज्यादा तैराकी नहीं कर रही है। दूसरे दिन मगरमच्छ का खतरा बताते रहे। तीसरे दिन भी उन्होंने ऐसा ही किया। जलपरी जब किसी घाट के करीब या फिर लोगों की नजरों के करीब आती तो गंगा में उतरकर तैरने लगती है। उन्होंने प्रेसवार्ता में अपनी आने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘जलपरी’ के कुछ दृश्य भी साझा किए। उसमें जलपरी के साथ चल रहे नाविक प्रमुख मानसिंह पासवान, गोताखोर पिंटू निषाद, राममिलन निषाद से बातचीत सुनाई। विनोद कापड़ी ने चर्चित बॉलीवुड फिल्म ‘मिस टनकपुर हाजिर हो’ और ‘कॉट टेक दिस शिट एनिमोर (राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार)’ बनाई है।
विनोद ने कहा, बच्ची निर्दोष
विनोद ने कहा कि बच्ची निर्दोष है। वह पिता के इशारे पर काम कर रही है। उसको देवी बनाकर पिता ललित उसका बचपन छीन रहे हैं। यह लाखों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ भी है। बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री को कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में भेजा जाएगा।
रविवार से शुरू की थी तैराकी
कानपुर की जलपरी ने 570 किमी का अभियान रविवार 28 अगस्त से शुरू किया था। उसे वाराणसी तक कुल 570 किलोमीटर की दूरी सात दिनों में तय करनी है। श्रद्धा के दावे के मुताबिक उसे शनिवार को वाराणसी पहुंचना है। इसके लिए उसे हर दिन औसतन 82 किमी से अधिक का सफर तय करना था लेकिन विनोद के इस दावे से अभियान पर सवाल खड़े हो गए हैं। जलपरी इसके पहले कानपुर से इलाहाबाद का सफर (280 किमी) तय कर लिम्काबुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। जार्ज टाउन स्थित तरणताल की पूर्व प्रशिक्षक क्रीड़ाधिकारी शीला भट्टाचार्या कहती हैं कि बाढ़ में तैराना आसान है लेकिन लगातार सात दिनों तक पानी में रहना और 80 किमी का सफर तैर कर पूरा करना, इसकी निगरानी करके ही कुछ कहा जा सकता है।
पिता से नहीं हो पाया संपर्क
इस मामले में जलपरी लक्ष्मी और उसके पिता ललित शुक्ला से बातचीत करने की कोशिश की गई। उनके मोबाइल नंबर पर भी कई बार संपर्क किया गया लेकिन मोबाइल पहुंच से बाहर बताता रहा।