सूत्रों के अनुसार पुलिस, एसटीएफ, एटीएस, प्रशासन, पीडीए और नगर निगम तक ऐसे संदिग्धों की तलाश हो रही है। माफिया को और उसके गिरोह के सदस्यों, गुर्गों को बचाने और उनकी संपत्तियों से आंख फेरने से लेकर अंदर की सूचनाएं लीक करने वाले कई अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। ऐसे अफसर भी निशाने पर हैं जिन्होंने कम समय में ही अकूत संपत्ति एकत्र कर ली और माफिया के लिए दांव-पेच में लगे हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार अबतक ऐसे 53 सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची तैयार हुई है, जो माफिया के लिए काम कर रहे थे। इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने आधी नौकरी प्रयागराज में ही बिता दी। ऐसे भी लोग चिह्नित किए गए हैं, जो दो-दो दशक से यहींं तैनात हैं और इसके लिए उन्होंने बकायदा कीमत भी चुकाई, लेकिन शहर नहीं छोड़ा। जाहिर है कहीं और से आने वाली मलाई इतनी अधिक थी कि शहर को छोड़ना उनके लिए सबसे बड़े घाटे का सौदा होता।