इविवि तय करेगा सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों की फीस
0 एकेडमिक कौंसिल की बैठक में लिया गया निर्णय
0 सभी शिक्षकों को समान रूप से दिया जाएगा वेतन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के संघटक कॉलेज में संचालित सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रमों में अलग-अलग और मनमानी फीस वसूले जाने की शिकायत पर इविवि प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। इविवि प्रशासन सभी संघटक कॉलेज में सेल्फ फाइसेंस के पाठ्यक्रमों की एक समान फीस निर्धारित करेगा। यह निर्णय मंगलवार को हुई विश्वविद्यालय की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में लिया गया।
इविवि प्रशासन को शिकायत मिली थी कि सेल्फ फाइनेंस के तहत संचालित एक ही पाठ्यक्रमों की संघटक कॉलेज ने अलग-अलग फीस निर्धारित कर रखी है। इसके अलावा यह शिकायत भी मिली की सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रम नियमित शिक्षक पढ़ाते हैं और उन्हें इसके लिए अलग से भुगतान नहीं किया जाता, जबकि इसका प्रावधान है और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इसी प्रावधान के तहत सेल्फ फाइनेंस का पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले शिक्षकों को अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। इसके अलावा कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस का पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए अलग से रखे गए शिक्षकोें को दिए जाने वाले वेतन में भी भिन्नता है। कहीं, 15 हजार तो कहीं 25 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रमों के लिए ली जा रही फीस की रकम आखिर कहां जा रही है।
इविवि प्रशासन ने इस पूरे मामले गंभीरता से लिया है। एकेडमिक कौंसिल की बैठक में निर्णय लिया गया कि संघटक कॉलेजों में संचालित सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रमों की फीस इविवि प्रशासन निर्धारित करेगा और सभी संघटक कॉलेजों को फीस की यही व्यवस्था लागू करनी होगा। फीस लेने में किसी तरह की मनमानी नहीं चलेगी। साथ ही सेल्फ फाइनेंस के लिए अलग से रखे जा रहे शिक्षकों का वेतन भी इविवि प्रशासन निर्धारित करेगा और कॉलेजों को एक समान फीस का भुगतान करना होगा। अगर सेल्फ फाइनेंस का पाठ्यक्रम कोई नियमित शिक्षक पढ़ा रहा है तो उसे अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। बैठक के दौरान शिक्षक भर्ती के लिए यूजीसी के 2018 के रेगुलेशन को अंगीकार किए जाने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए छह माह का समय है। तय हुआ कि निर्धारित समय सीमा में विश्वविद्यालय इसे अंगीकार कर लेगा।
एमपीएड के लिए एनसीटीई से ली जाएगी अनापत्ति
इविवि में एमपीएड में प्रवेश नहीं हो रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इसके लिए एनसीटीई से एमपीएड को मान्यता मिलने का इंतजार कर रहा है। बैठक के दौरान एमपीएड में प्रवेश के लिए गठित समिति के चेयरमैन प्रो. अनुपम दीक्षित को एनसीटीई से अनापत्ति प्राप्त करने के लिए अधिकृत किया गया और तय हुआ कि एनसीटीई से अनापत्ति मिलने के बाद ही एमपीएड में प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।