पीसीएस मुख्य परीक्षा दोबारा टलने के आसार
0 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित होने पर कई अभ्यर्थी होंगे प्रभावित
0 बदलेगा कटऑफ, मेरिट में शामिल और बाहर हो सकते हैं कई अभ्यर्थी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के तहत तीन सवालों पर विवाद के मामले में परिणाम संशोधित किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीसीएस मुख्य परीक्षा के दोबारा टलने के आसार बन गए हैं। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में 677 पदों के मुकाबले कुल 14032 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किए गए थे। परिणाम संशोधित होने के बाद मेरिट में बदलाव तय है। कई चयनित अभ्यर्थी मेरिट से बाहर हो सकते हैं और कई असफल अभ्यर्थियों का चयन भी हो सकता है। परिणाम संशोधित होने पर कटऑफ में भी बदलाव होगा।
पीसीएस मुख्य परीक्षा 17 मार्च को प्रस्तावित थी, लेकिन इस बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू होने पर कई परीक्षाएं टाल दी गईं, जिनमें पीसीएस मुख्य परीक्षा भी शामिल थी। परीक्षा को टालकर नई तिथि 17 मई निर्धारित की गई, लेकिन अब इसके भी टलने के आसार हैं। आयोग के सूत्रों का कहना है कि एक प्रश्न को डिलीट करने और दो प्रश्नों में संशोधन के बाद ओएमआर कॉपियों की जांच नए सिरे से की जाएगी। नई मेरिट बनेगी और फिर संशोधित परिणाम जारी होगा। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। ऐसे में 17 मई को प्रस्तावित मुख्य परीक्षा टलने के आसार बढ़ गए हैं। 677 पदों के लिए पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 24 सितंबर को दो पालियों में आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए प्रदेश के 21 जिलों में कुल 982 और इलाहाबाद में 68 केंद्र बनाए गए थे। प्रदेश भर से परीक्षा के लिए कुल चार लाख 55 हजार 297 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें दो लाख 46 हजार 654 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे।
पहले हटाए जा चुके हैं दस सवाल
0 आयोग ने 19 जनवरी को पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के परिणाम के साथ अंतिम उत्तरकुंजी भी जारी की थी। प्रतियोगियों की आपत्तियों के आधार पर इसमें संशोधन के बाद सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्न पत्र में चार अन्य सवालों को भी डिलीट कर दिया गया था। वहीं, संशोधन से पहले 17 नवंबर को जारी उत्तरकुंजी में आयोग ने अपनी तरफ से सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में एक और द्वितीय प्रश्नपत्र में पांच सवाल हटाए थे। इस तरह आयोग ने कुल दस प्रश्नों को डिलीट कर दिया था, लेकिन अभ्यर्थियों ने कुछ अन्य प्रश्नों पर भी आपत्ति की थी। आयोग ने उन प्रश्नों पर कोई निर्णय नहीं लिया, जिसके बाद अभ्यर्थी 14 प्रश्नों पर आपत्ति को लेकर न्यायालय चले गए।
सुप्रीम कोर्ट जा सकता है आयोग
0 पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 में एक सवाल को डिलीट करने और दो को संशोधित किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश को यूपीपीएससी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है। हालांकि, इस पर निर्णय आयोग की बैठक में होगा। बैठक में ही तय होगा कि फैसले को चुनौती दी जाए या परिणाम संशोधित किया जाए।
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स्तरीय विशेषज्ञों की कमी से दिक्कत
- आयोग की परीक्षाओं में विवाद कोई नई बात नहीं है। आयोग के पास स्तरीय विशेषज्ञ नहीं हैं। इससे पहले भी परीक्षाओं में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले न्यायालय तक जा चुके हैं और आयोग को परीक्षा परिणाम में संशोधन भी करना पड़ा है। हालांकि, इस परीक्षा के लिए आयोग ने 26 विशेषज्ञों की कमेटी बनाई थी। आयोग ने हाईकोर्ट को हलफनामा देकर बताया कि उत्तरकुंजी जारी करने से पहले विशेषज्ञों की कमेटी ने प्रश्नों पर विधिवत विचार करने के बाद उन्हें सही बताया था। उधर, प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग के अध्यक्ष परीक्षा समिति के भी अध्यक्ष हैं। परीक्षाओं में अनियमितता के कारण छात्रों को ज्यादातर मामलों में न्यायालय जाना पड़ रहा है। परीक्षा में पेपर लीक की घटना भी हो चुकी है। ऐसे में अध्यक्ष एवं सदस्यों इस्तीफा दे देना चाहिए या शासन को अपने स्तर से कार्रवाई करनी चाहिए।