समय पर शादी, बदलती लाइफ स्टाइल और अपने खान-पान को संभालकर रखिए! नहीं तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। शहर में संचालित कैंसर चिकित्सकीय संस्थानों की रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। आंकड़े बताते हैं कि समय पर शादी नहीं करने, खानपान में बदलाव होने और रहन सहन अनियमित होने से लोग इसकी चपेट में आए हैं। पुरुषों में मुंह और महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा अधिक है। ऐसे मरीजों की संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है।
इलाहाबाद और उसके आसपास के जिलों कौशाम्बी, फतेहपुर, भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर से कैंसर के हर वर्ष करीब सात हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। इनमें महिलाओं और पुरुषों का अनुपात 55/45 का है। इन जिलों के तहत अकेले महिलाओं में कैंसर के हर वर्ष करीब चार हजार नए मामले (एक लाख की आबादी पर कैंसर के औसतन 150 )सामने आ रहे हैं। कैंसर फिजीशियन डॉ.बीके मिश्रा कहते हैं कि कैंसर पीड़ित महिलाओं में पचास फीसदी स्तन कैंसर की चपेट में हैं। दूसरे नंबर पर गर्भाशय का कैंसर और फिर ओवरी (अंडाशय) कैंसर हो रहा है। गर्भाशय का कैंसर ज्यादातर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में पाया गया।
डॉ.मिश्रा महिलाओं में इन तीनों प्रकार के कैंसर की मुख्य वजह शादी में देरी, बदलती जीवन शैली और धूम्रपान हैं। देर से शादी से महिलाओं में होेने वाले हार्मोनल बदलाव समय पर नहीं हो पाते हैं, जिससे इसकी संभावना बढ़ जाती है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में मुंह का कैंसर खूब हो रहा है। दूसरे नंबर पर फेफड़े का कैंसर है। इसकी वजह तंबाकू और धूम्रपान है। कैंसर के कुल मरीजों में साठ से सत्तर फीसदी मरीज उपचार कराने देर से अस्पताल पहुंचते हैं। कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में महज 12 से 13 फीसदी लोग ही अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि विदेशों में यह आंकड़ा 80 फीसदी तक है। महिलाओं मेें होने वाले स्तन कैंसर का काफी हद तक निदान हो सकता है। बाजार में नई तरह की दवाएं आईं हैं जिनके इस्तेमाल से स्तन में फैले कैंसर को चिन्हित कर उसे सर्जरी से पूरी तरह से निकाला जा सकता है। कैंसर सर्जन डॉ.सपन श्रीवास्तव कहते हैं, सर्जरी के बाद बहुत से मरीजों को रेडियोथिरेपी या फिर कीमोथिरेपी भी दी जाती है। अब तो एडवांस उपकरणों की वजह से टारगेटेड रेडियोथिरेपी और कीमोथिरेपी दी जाती है। जिसका साइडइफेक्ट भी मरीजों पर कम ही पड़ता है।
स्तन कैंसर से बचाव को खुद करें स्क्रीनिंग
0 महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर से बचने के लिए खुद से स्क्रीनिंग (जांच) करते रहना जरूरी है। पहला 40 साल की उम्र से नीचे की महिलाएं महीने में एक या दो बार खुद ही देखें कि उन्हें कहीं कोई गांठ तो नहीं हो रही है। अगर गांठ बन रही हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए जबकि 40 से अधिक उम्र की महिलाओं को मैमोग्राफी जरूरी है। चिकित्सकों के मुताबिक महिलाओं को साल भर में एक बार मैमोग्राफी जरूर करवानी चाहिए।
गर्भाशय के कैंसर से बचाएगा टीका
0 गर्भाशय के कैंसर से बचाने के लिए आजकल टीका भी बाजार में आ गया है। यह टीका 10 से 15 साल तक की उम्र की लड़कियों को लगाया जाता है। इसके लगाए जाने से गर्भाशय के कैंसर का खतरा नहीं रह जाता है। टीका बाजार में दवा की दुकानों पर करीब आठ सौ रुपये में आसानी से मिल जाएगा।