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आयोग से लेकर सचिवालय तक सवालों के घेरे में

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एपीएस भर्ती में फर्जीवाड़ा
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आयोग से लेकर सचिवालय तक सवालों के घेरे में
0 गड़बड़ी सामने आने के बाद संबंधित अफसरों पर लटक रही कार्रवाई की तलवार
0 कुछ अफसरों, गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों पर शिकंजा कस सकती है सीबीआई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस)-2010 की भर्ती में फजीवाड़ा का खुलासा होने के बाद अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से लेकर सचिवालय तक सवालों के घेरे में है। आयोग ने तो गड़बड़ी की ही, सचिवालय प्रशासन ने भी छह अभ्यर्थियों की नियुक्ति के वक्त उनके अभिलेख नहीं जांचे और सत्यापन किए बगैर नौकरी दे दी। सोमवार को इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद संबंधित अफसरों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। सीबीआई भी शिकंजा कस सकती है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुए अभिलेखों के सत्यापन के बाद एपीएस-2010 में छह अभ्यर्थियों का चयन गलत पाया गया है। इनमें से चार के पास कंप्यूटर की अर्हता ही नहीं थी और दो के पास कोई अभिलेख नहीं थे। इसके बावजूद सभी छह अभ्यर्थियों को नौकरी दे दी गई। फिलहाल, इन सभी अभ्यर्थियों का चयन निरस्त कर दिया गया है। अभ्यर्थियों के अभिलेखों की जांच दो स्तर पर होती है। नियुक्ति की संस्तुति से पहले आयोग में अभिलेखों की जांच होती है और फिर नियुक्ति से पहले सचिवालय प्रशासन अभिलेखों की जांच करता है, लेकिन इन छह अभ्यर्थियों के अभिलेखों को जांचे बगैर उनकी नियुक्ति की संस्तुति शासन को भेज दी गई और सचिवालय प्रशासन ने भी बिना किसी जांच के उन्हें नियुक्ति दे दी।
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सीबीआई ने जब यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू की तो एपीएस-2010 परीक्षा जांच के दायरे से बाहर थी, लेकिन सीबीआई को सबसे अधिक शिकायतें इसी परीक्षा को लेकर मिलीं। शुरुआती जांच में सीबीआई को भी इस बात के सुराग मिले कि इस परीक्षा के जरिए आयोग और शासन स्तर के कई अफसरों के करीबी रिश्तेदारों का एपीएस के पद पर चयन किया गया है और उनके अभिलेखों में भी हेरफेर किया गया है। यही वजह रही कि सीबीआई की इस परीक्षा की जांच के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ी। इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद सीबीआई अब गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों और संबंधित अफसरों पर शिकंजा कस सकती है।
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