केस एक
75 वर्षीय शांति देवी, फूलपुर के नसरतपुर गांव की रहने वाली हैं। इन्हें मई 2024 में मृत घोषित कर दिया गया। 23 जून से इनकी पेंशन बंद हो गई। इनके बेटों के अनुसार, अम्मा खुद ब्लॉक ऑफिस गईं और अफसर से बोलीं कि देख लो बेटा, मैं जिंदा हूं। फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा।
केस दो
67 वर्षीय किताबुनिशा को भी मरे हुए लोगों की सूची में डाल दिया गया। उन्हें तब पता चला जब पेंशन अकाउंट में नहीं आई। समाज कल्याण विभाग की खामोशी ने इनकी तकलीफें और बढ़ा दीं।
केस तीन
76 वर्षीय बैजनाथ ने को पेंशन रुकने की तारीख भी याद है। वह आंखों में गुस्सा और बेबसी लिए बताते हैं कि सरकार पेंशन देती है लेकिन जब लेने जाओ तो बोल दिया जाता है कि तुम मृत हो।
केस चार
86 वर्षीय धनपति को डीएम के निर्देश पर दोबारा जांच में जीवित पाया गया। अक्टूबर 2025 में उनकी पेंशन फिर शुरू हुई लेकिन उनका सवाल है कि अब कौन भरोसा करे कि अगली बार फिर कागजों में मृत घोषित नहीं किया जाएगा।
सत्यापन के दौरान 400 बुजुर्गों को मृत बताए जाने के बाद वर्ष 2020 से 2025 के बीच में पेंशन बंद कर दी गई थी। मामला संज्ञान में आने के बाद सभी की पेंशन दोबारा मंजूर कर शासन को जानकारी दे दी गई है। 53 लोगों की पेंशन उनके खाते में पहुंच चुकी है। शेष लोगों की भी जल्द पहुंचने की उम्मीद है। डीएम के निर्देश पर एक सचिव और पर्यवेक्षक के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। - रामशंकर पटेल, जिला समाज कल्याण अधिकारी