इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी के कथित अपहरण के मामले में पुलिस के अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने और महिला को बरामद न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब एक गरीब व्यक्ति अपनी पत्नी को खोजने और न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रहा हो तो न्यायालय अपनी आंखें बंद नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने पुलिस की लापरवाही को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी), बिजनौर को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे कथित तौर पर अपहृत महिला उषा देवी को बरामद करें और अगली सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष पेश करें। यदि महिला को पेश नहीं किया गया तो एसपी बिजनौर को 16 अक्तूबर 2025 को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने बृजेश उर्फ ब्रजपाल की जमानत अर्जी पर दिया है।
मामला बिजनौर के कोतवाली शहर पुलिस स्टेशन का है। शिकायतकर्ता गजराज सिंह ने आठ अगस्त 2012 को एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि याची ब्रजपाल और सह-आरोपी उसकी पत्नी उषा देवी को सुभाष चौराहा, बिजनौर से एक कार में ज़बरदस्ती उठा ले गए। पुलिस ने 18 दिसंबर 2013 को यह कहते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी कि अपहरण का कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला।
शिकायतकर्ता ने इसके बाद विरोध याचिका दायर की जिसे एक शिकायत वाद के रूप में दर्ज किया गया और आरोपियों को 22 जुलाई 2016 को तलब किया गया। समन आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण दायर किया जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया और जमानत के लिए आवेदन दायर किया जिसे 24 जनवरी 2025 को अस्वीकार कर दिया गया। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने पाया कि अपहरण का मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने अपहृत महिला को बरामद करने में लापरवाही बरती। कोर्ट ने अपनी निहित असाधारण शक्ति का प्रयोग करते हुए एसपी बिजनौर को अपहृत महिला उषा देवी को बरामद करने का निर्देश दिया।