यूपी बोर्ड की ओर से सीबीएसई स्कूलों की तर्ज पर अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू करने की योजना को बोर्ड के परीक्षक ही लागू करने में बाधा बन रहे हैं। बोर्ड की ओर से 26 जनवरी तक प्रयोगात्मक परीक्षा पूरी करने की समय सीमा रखी गई है। बोर्ड की ओर से तय परीक्षकों के समय से नहीं पहुंचने के कारण अभी तक 40 फीसदी विद्यालयों में प्रयोगात्मक परीक्षा पूरी नहीं हो सकी है।
बोर्ड की ओर से तय कुछ परीक्षक परीक्षा लेने से पहले ही संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं विषय अध्यापक से संपर्क करके तय समय सीमा के बाद में आकर परीक्षा कराने की बात कर रहे हैं। ऐसे में बिना परीक्षा कराए ही कुछ स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने परीक्षकों को यह प्रमाण पत्र दे दिया है कि उनके विद्यालय में परीक्षा हो गई है। यूपी बोर्ड की ओर से पहले चरण की परीक्षा में लगातार मौसम खराब होने के कारण आधे से अधिक विद्यालयों में प्रयोगात्मक परीक्षा से तय समय पर पूरी नहीं हो सकी थी। दूसरे चरण की प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए अंतिम तिथि 26 जनवरी तक पता चला है कि 40 फीसदी विद्यालयों में प्रमुख विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षा पूरी नहीं हुई है।
शहर के एक इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य ने बताया कि प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए तय परीक्षक समय से नहीं पहुंचे हैं, कुछ परीक्षक 26 जनवरी के बाद फरवरी में किसी तिथि पर आकर प्रयोगात्मक परीक्षा कराने का आश्वासन देकर स्कूलों से परीक्षा पूरी कराने का प्रमाण पत्र हासिल करके बोर्ड को भेजने की तैयारी में है। परीक्षा किसी तिथि पर आकर पूरी करवा लेंगे।