इलाहाबाद हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और एसआरएन के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ने बताया है कि स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में घूम रहे आवारा कुत्तों से लोगों की सुरक्षा के लिए 40 भूतपूर्व सैनिकों की तैनाती कर दी गई है। इसमें में से एक पर्यवेक्षक स्तर का है, नौ सशस्त्र गार्ड हैं और तीस अन्य सुरक्षा गार्ड शामिल हैं।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की अदालत कर रही है। कोर्ट में अस्पताल में कुत्तों के आतंक को लेकर सरकार और अस्पताल प्रशासन से जवाबी हलफनामा तलब किया था। राज्य सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल रख रहे हैं।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों / स्वायत्त राज्य मेडिकल कॉलेजों / विश्वविद्यालयों / कॉलेजों में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देशों को निर्धारित करते हुए दस सितंबर को सरकार ने विस्तृत आदेश भी जारी किया है।
वहींं, एसआरएन के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने हलफनामे में बताया कि अस्पताल में विभिन्न विभागों में पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए शौचालय युक्त कुल तीस विश्राम कक्ष बनाएं गए हैं। हालांकि, पल्मोनरी विभाग और ईएनटी विभाग में महिला डॉक्टरों के लिए कोई ड्यूटी रूम नहीं है। सर्जरी विभाग में विश्राम कक्ष की मरम्मत की गई है।
कोर्ट ने पाया कि हलफनामा संग दाखिल चार्ट के मुताबिक कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, सर्जरी (आपातकाल) के अलावा, पल्मोनरी और ईएनटी विभाग में महिला डॉक्टरों के लिए ड्यूटी रूम निर्माणाधीन हैं। कोर्ट ने पूछा कि कुछ विभागों में कई वार्ड हैं, लेकिन ड्यूटी रूम केवल एक है, ऐसा क्यों है?
कोर्ट ने उक्त जानकारी के साथ सीएमएस से अतिरिक्त हलफनामा तलब करते हुए यह भी बताने को कहा है कि सभी विभागों में महिला डॉक्टरों के लिए अलग ड्यूटी रूम के निर्माण की क्या योजना है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अक्तूूबर की तारीख नियत की है।