प्रयागराज। नगर निगम सीमा विस्तार का लाभ 207 गांवों के करीब 4.25 लाख लोगों को मिलेगा। करीब 12 साल बाद कई बार संशोधित इस प्रस्ताव पर सरकार ने मुहर लगा दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहर की सीमा से सटे इन ग्रामीण इलाकों लोगों को नए साल में शहरी सुविधाओं का तोहफा मिलेगा।
सीमा विस्तार का पहला प्रस्ताव वर्ष 2007 में नगर निगम प्रशासन ने भेजा था। तब इस विस्तार सूची में 647 गांव शामिल किए गए थे। शासन में हर बार कोई न कोई आपत्ति लगती और मामला अटक जाता। करीब साल भर पहले प्रशासन ने इस दिशा में प्रयास शुरू किए। गांवों की सूची संशोधित कर 238 पर सीमित कर दी गई। 24 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की आपत्ति पर मामला एक बार फिर अटक गया। सूची में संशोधन कर मंत्री से वार्ता कर शहर पश्चिमी के 11 गांव अलग किए गए। फूलपुर तहसील के 19 ग्राम सभाओं को भी हटाया गया। 207 गांवों की संशोधित सूची पर मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दी।
नगर निगम सीमा विस्तार से जुड़े गांवों की तस्वीर बदल जाएगी। इसमें दो से पांच वर्ष का समय लग सकता है लेकिन, व्यवस्थाएं शहरी मोहल्लों की तर्ज पर विकसित की जाएंगी। इन गांवों में सड़क, नाली, खड़ंजा, के साथ पार्क विकसित किए जाएंगे। भूमिगत बिजली की लाइन, पेयजल और सीवर की लाइन संग स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था नगर निगम करेगा।
बदलेगी जमीन की मालियत और सुधरेगी किसानों की दशा
अरसे बाद सीमा विस्तार की मंजूरी से नगर निगम सीमा में शामिल हुए गांवों की जमीन की मालियत बदल जाएगी। कीमतों के साथ उपभोग परिवर्तन भी होगा। यही नहीं शहरीकरण से खेती किसानी से दूर हो चुके किसानों की दशा भी सुधरेगी।
विकास से बदलेगी सूरत
गांवों के शहरीकरण से क्षेत्र की सूरत ही बदल जाएगी। नए बाजार और मंडियां विकसित होंगी। यही नहीं इन इलाकों में अब ग्रामीण बैंक नहीं, राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं खोली जाएंगी। साथ ही एटीएम आदि की भी सुविधा बढ़ाने की योजना है। बड़ी राहत विस्तारीकरण में शामिल होने वाले लोगों के स्तर में आएगा। एक ही झटके में इन इलाकों में किराए की दरें बढ़ जाएंगी।
सीमा विस्तार में सदर तहसील के 24, सोरांव के 26, करछना के 94
और झूंसी नगर पंचायत समेत फूलपुर के 63 गांव भी निगम में
नगर निगम के सीमा विस्तार में सर्वाधिक लाभ यमुनापार इलाके को मिलेगा। 207 गांवों में करछना तहसील के 94 गांव शामिल किए गए हैं। इनमें कई गांव ऐसे हैं, जो बरसों से शहरी आबादी में घुले मिले हैं, लेकिन वहां पार्षदी का नहीं प्रधानी का चुनाव होता रहा है। अरैल, चक इमाम अली समेत कई गांव इसके उदाहरण हैं। इसी क्रम में विस्तार में सदर तहसील के 24, सोरांव के 26 और झूंसी नगर पंचायत समेत फूलपुर के 63 गांव भी शामिल किए गए हैं। तकरीबन आधे से अधिक गांवों की वह आबादी पहले से ही सुविधाओं से आबाद है, जो हाईवे के किनारे या किसी बड़ी सड़क के किनारे बसे हैं।
पीडीए बना चुका है कॉलोनियां
सीमा विस्तार में शामिल ग्राम सभाओं में ही नहीं, पीडीए इससे इतर दूर-दूर तक कॉलोनियां बना चुका है। नैनी में अवंतिका कॉलोनी, शहर पश्चिमी में झलवा और देवघाट में प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं में जगह ही नहीं बची है। इस प्रस्ताव से पीडीए को न केवल भूमि अर्जन में आसानी होगी बल्कि नई आवासीय योजनाओं को विकसित करने में सहूलियत होगी।
शहरी सीमा से सटे हैं ये गांव
शहर पश्चिमी- उमरपुर नींवा, गयासुद्दीनपुर, रसूलपुर, बम्हरौली, झलवा, देवघाट, पीपल गांव, बक्शी मोढ़ा आदि
फाफामऊ- रंगपुरा, बहमलपुर, मलाक हरहर, गद्दोपुर, रूदापुर, बेला, गोहरी, सरांय गोपाल आदि
नैनी- अरैल, मोहब्बतगंज, छिंवकी, महेवा पूरब और पश्चिम पट्टी, मड़ौका, चक इमाम अली, देवरख, बसवार आदि
झूंसी- शेरडीह, बदरा सुनौटी, पूरे सूरदास, लेखराजपुर, हवेलिया, छतनाग, त्रिवणीपुरम आदि
शहर में नगर निगम सीमा में शामिल नए गांवों की तस्वीर बदलने के लिए विस्तृत योजना बनाई जाएगी। वहां की जनता को बुनियादी सुविधाएं दिलाने कार्ययोजना प्रस्तावित है। निगम की ओर से पेयजल-सीवर लाइन, सड़क, नाली, खड़ंजा मार्ग का निर्माण, पार्कों का विकास कराया जाएगा। स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था भी की जाएगी। सभी विभागों के साथ बैठक विस्तृत कार्ययोजना बनाकर अमल किया जाएगा। - अभिलाषा गुप्ता नंदी, महापौर
शासन के निर्देश पर शहर सीमा में शामिल किए गए गांवों के विकास के लिए नगर निगम तैयार है। योजना तैयार कर चरणबद्ध तरीके से नागरिक सुविधाओं के लिए कार्य कराए जाएंगे। प्रस्तावों के आधार पर शासन की स्वीकृति और बजट भी मांगा जाएगा। - रवि रंजन, नगर आयुक्त