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परीक्षा नियंत्रक से 36 घंटे तक पूछताछ, कई सवालों पर छूट गए पसीने

Fri, 31 May 2019 12:01 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रयागराज - फोटो : Prayagraj
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लोकसेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक को हिरासत में लेने से पहले करीब 36 घंटे तक उनसे गहन पूछताछ की गई। इस दौरान पूछे गए कई सवालों का वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। कुछ सवालों पर तो उनके पसीने छूट गए। इस दौरान कई बार वह जवाब देते हुए हड़बड़ाईं भी। पूछताछ में संतुष्ट नहीं होने के बाद ही उन्हें हिरासत में लेकर क्राइम ब्रांच की टीम वाराणसी के लिए रवाना हो गई और वहां उनको गिरफ्तार कर लिया गया। 
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27 मई को वाराणसी में प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार कर की गिरफ्तारी के बाद से ही परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार पर शिकंजा कसना शुरू हो गया था। 28 मई को एसटीएफ लखनऊ के इंस्पेक्टर बिजेंद्र शर्मा ने वाराणसी के चोलापुर में कौशिक व उसके सात साथियों समेत कुल नौ लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई। सबसे खास बात यह थी कि नामजद आरोपियों में लोकसेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार का भी नाम शामिल था। एफआईआर दर्ज होने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट जारी कराकर टीम कुछ घंटे बाद ही रवाना हो चुकी थी और रात 12.15 बजे के करीब शहर पहुंचकर टीम ने लोकसेवा आयोग कार्यालय में धावा बोल दिया। टीम ने वहां पहुंचते ही सबसे पहले गेस्ट हाउस स्थित परीक्षा नियंत्रक के कक्ष संख्या 15 को कब्जे में ले लिया और तलाशी ली। इसमें उनका मोबाइल व लैपटॉप के साथ ही कुछ दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया। इसके बाद 36 घंटों तक उनसे कई चरणों में पूछताछ की गई। हालांकि, संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद बृहस्पतिवार दोपहर 2:30 बजे के करीब उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद क्राइम ब्रांच उन्हें साथ लेकर वाराणसी के लिए रवाना हो गई। सूत्रों की मानें तो क्राइम ब्रांच अफसरों की ओर से पूछे गए कुछ सवालों पर परीक्षा नियंत्रक के पसीने छूट गए। इस दौरान कई बार सवालों का जवाब उन्होंने हड़बड़ाहट में दिया। संतुष्ट न होने के बाद ही उन्हें हिरासत में लेने का निर्णय लिया गया। 

कई चरणों में हुई पूछताछ

28 मई- पहला दिन
सूत्रों की मानें तो परीक्षा नियंत्रक से क्राइम ब्रांच ने कई चरणों में पूछताछ की गई। पहले दिन जांच करने पहुंची टीम ने उनके कमरे के एक-एक कोने की तलाशी ली। इसके साथ ही उनके मोबाइल व लैपटॉप की भी जांच की गई। उनके मोबाइल व लैपटॉप से पुलिस को कुछ अहम जानकारियां मिलीं। इसके बाद दोनों ही गैजेट सील कर पुलिस टीम ने कब्जे में ले लिया। चर्चा रही कि मोबाइल में पेपर लीक प्रकरण के मुख्य आरोपी कौशिक से हुई व्हाट्सएप चैट भी मिली। इसका स्क्रीन शॉट भी लिया गया। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। इसके अलावा कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को पूर्व में हुई परीक्षाओं के साथ ही एलटी ग्रेड परीक्षा से संबंधित दस्तावेज भी मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया। हालांकि, पुलिस टीम को मौके से वह रुपये नहीं मिले, जो पेपर लीक प्रकरण के मुख्य आरोपी कौशिक ने परीक्षा नियंत्रक को दिए जाने की बात एसटीएफ अफसरों को बताई थी। 
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29 मई- दूसरा दिन
दूसरे दिन यानी 29 मई को टीम ने परीक्षा नियंत्रक से पेपर लीक प्रकरण के आरोपी कौशिक के बयान और उससे किए गए व्हाट्सएप चैट के बारे में पूछताछ की। सूत्रों की मानें तो टीम ने सबसे पहले पूछा कि कौशिक 26 मई को उनसे मिलने शहर आया था या नहीं। जिस पर परीक्षा नियंत्रक ने इसका जवाब हां में दिया। लेकिन, जब कौशिक की ओर से उनको 10 लाख रुपये दिए जाने के बाबत सवाल किया गया तो परीक्षा नियंत्रक ने साफ इंकार कर दिया। सूत्रों की मानें तो इसके बाद उनके बैंक अकाउंट की डिटेल भी मांगी गई। दोपहर तक उनसे इसी बारे में पूछताछ होती रही। दोपहर बाद टीम ने कौशिक के मोबाइल से मिले व्हाट्सएप चैट के संबंध में उनसे पूछताछ की। बता दें कि कौशिक के व्हाट्सएप कॉन्टैक्ट में ‘Uppsc Coe Anju Katiyar’ का अकाउंट मिला था। इसमें पुलिस इंक्वायरी और शिकायतकर्ता अशोक देव चौधरी के मामले में बात की गई थी। सूत्रों की मानें तो परीक्षा नियंत्रक  को जब यह व्हाट्सएप चैट दिखाई गई तो वह हड़बड़ा गईं। साथ ही कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। 


30 मई- तीसरा दिन
सूत्रों की मानें तो बृहस्पतिवार को आखिरी दिन हुई पूछताछ के दौरान परीक्षा नियंत्रक सबसे ज्यादा असहज नजर आईं। इस दिन सुबह आयोग कार्यालय पहुंचने के बाद टीम ने उनसे ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी आरोपी कौशिक कर के प्रिंटिंग प्रेस को पेपर छपाई काम देने के बाबत पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि इस साल फरवरी में ही आयोग को पत्राचार के माध्यम से बता दिया गया था कि एलटी ग्रेड भर्ती परीक्षा 2018 पेपर लीक मामले में कोलकाता स्थित ब्लेसिंग स्क्योर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिक कौशिक की भूमिका संदिग्ध है और टीम उसके खिलाफ जांच कर रही है। इसके बावजूद आगामी परीक्षा का पेपर छापने का काम उसे क्यों दिया गया। सूत्रों की मानें तो इस सवाल पर परीक्षा नियंत्रक पसीना-पसीना हो गईं। उन पर लगे गोपनीयता भंग करने के आरोप के बारे में भी पूछा गया तो वह सकपका गईं। दरअसल, कौशिक ने पूछताछ में एसटीएफ अफसरों को बताया था कि अशोक देव को लेकर परीक्षा नियंत्रक बेहद परेशान रहती थीं और उसके बारे में व्हाट्सएप व फोन के माध्यम से पूछा करती थीं। यही नहीं उन्होंने यह भी बताया था कि उसकी कंपनी के खिलाफ पुलिस मुकदमा लिखाना चाहती है। पूछताछ के दौरान उनसे क्राइम ब्रांच ने पूछा कि एसटीएफ की ओर से किए गए बेहद गोपनीय पत्राचार के बारे में उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस मालिक केा क्यों बताया तो वह कोई जवाब नहीं दे सकीं।
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