सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ मंसूर अली पार्क में रविवार को 36वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहा।
इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित संस्कृतिकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच कर अपनी तकरीरों से उनमें जोश भरा।
कहा, वर्ग और मजहब के आधार पर बने विभाजनकारी कानूनों को कतई मंजूर नहीं किया जाएगा। इससे पूर्व शहर के विभिन्न इलाकों से प्रदर्शनस्थल तक महिलाओं ने जुलूस निकाले, गीत गाए और नाटक का मंचन कर सरकारी नीतियों के खिलाफ नारे लगाए।
जमात ए इस्लामी हिंद उत्तर प्रदेश पूर्वी जोन के सचिव मौलाना मो.जहीर आलम फलाही ने कहा कि काले कानून लाने से बीजेपी का चेहरा उजागर हुआ है।
मोदीनामा पुस्तक के लेखक सुभाष गताडे ने फैज की नज्म पढ़कर महिलाओं मे जोश भरा।
मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमय्या राना ने कहा कि लोगों पर दमनकारी कानून थोपा जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बहुजन क्रांति मोर्चा कौशांबी के जिला प्रभारी प्रमोद कुमार सरोज ने भी कानून की आलोचना की।
सपा के दान बहादुर सिंह मधुर ने कहा, जाति, धर्म, दल, पंथ से हटकर देश के संविधान की रक्षा के लिए सभी को आगे आना होगा। कानुपर की सहिफा खान, जैनबुल गजाली, राजवेंद्र सिंह, सोनी गर्ग, प्रीति विश्वकर्मा, एकता सरन, वीरेंद्र पांडेय, राबिया, चांदनी आदि ने भी अपनी बात रखी।
पार्क में दो विदेशी मीडियाकर्मियों ने भी पहुंचकर प्रदर्शन के बारे में जानकारी हासिल की।
पार्क में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के साथ कानूनी किताबों के स्टाल लगाए गए हैं। प्रदर्शन स्थल पर सारा अहमद, सबीहा मोहानी, अब्दुल्ला तेहामी, जीशान रहमानी, फराज उस्मानी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।