महाकुंभ में खप्पर पूजा की तैयारी करते संत।
- फोटो : अमर उजाला।
वैष्णव परंपरा के तपस्वी वसंत पचंमी से कुंभनगरी में परंपरागत कठिन साधना आरंभ करेंगे। खाक चौक में इसको लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। इस दफा करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी धूनी साधना की खप्पर तपस्या करेंगे। यह तपस्या सबसे आखिरी श्रेणी की होती है। इसके आधार पर ही अखाड़े में साधुओं की वरिष्ठता तय होती है। वैष्णव परंपरा में श्रीसंप्रदाय (रामानंदी संप्रदाय) में धूना तापना सबसे बड़ी तपस्या मानी जाती है।
पंचांग केे मुताबिक यह तपस्या आरंभ होती है। तेरह भाई त्यागी आश्रम के परमात्मा दास ने बताया कि सूर्य उत्तरायण के शुक्ल पक्ष से यह तपस्या आरंभ की जाती है। तपस्या से पहले साधक निराजली व्रत रखता है। इसके बाद धूनी में बैठते हैं। छह चरण में तपस्या पूरी होती है। इन छह चरणों में पंच, सप्त, द्वादश, चौरासी, कोटि एवं खप्पर श्रेणी होती है। हर श्रेणी तीन साल में पूरी होती है। इस तरह तपस्या पूरी करने में 18 साल का समय लगता है।