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32 जिलों में फिर से शुरू हो सकती है मार्निंग कोर्ट

Sat, 02 May 2015 02:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद। प्रदेश के 32 जिलों में मॉर्निंग कोर्ट की व्यवस्था फिर से लागू की जा सकती है। अगर उन जिलों के अधिवक्ता संगठन इस पर राजी होंगे तो व्यवस्था जल्दी ही लागू कर दी जाएगी। लेकिन इस बार अदालतें बदले समय  सुबह 6.30 बजे के बजाए 8.30 बजे बैठेगी और दिन में 2.30 बजे तक काम करेगी। तीस अप्रैल को हाईकोर्ट की फुलकोर्ट मीटिंग में इस आशय का निर्णय लिया गया। सभी जिला जजों से कहा गया है कि वह अपने यहां अधिवक्ता संगठनों से वार्ता कर रिपोर्ट मुख्य न्यायमूर्ति को भेजे। मॉनिंग कोर्ट की व्यवस्था गत वर्ष समाप्त कर दी गई थी जिसका अधिवक्ता विरोध कर रहे थे। कई जिलों में इसे लेकर महीनों हड़ताल रही। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने मार्निंग कोर्ट फिर से बहाल करवाने के लिए बकायदा आंदोलन छेड़ रखा था।
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बार कौंसिल ऑफ यूपी के पूर्व उपाध्यक्ष आईके चतुर्वेदी ने बताया कि चेयरमैन अब्दुल रज्जाक खां के नेतृत्व में 29 अप्रैल को कौंसिल का प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और वरिष्ठ न्यायमूर्ति राकेश तिवारी तथा वीके शुक्ला से मिला था। जजों ने प्रतिनिधिमंडल को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था। बार के प्रतिनिधिमंडल ने प्रात:कालीन अदालतों का समय बदलकर उसे फिर से शुरू करने की सलाह दी थी। 30 अप्रैल को हुई फुलकोर्ट मीटिंग में यह प्रस्ताव पास कर दिया गया है।

हाईकोर्ट द्वारा बार कौंसिल को पत्र भेज कर इसकी जानकारी दी गई है। बताया कि संबंधित जिला जजों से अपने यहां के अधिवक्ता संगठनों से वार्ता कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। यदि संघ नए समय के लिए तैयार हैं तो मुख्य न्यायमूर्ति इस आशय का आदेश जारी कर देंगे। वहीं बार कौंसिल के चेयरमैन अब्दुल रज्जाक खां द्वारा जारी विज्ञाप्ति में फुलकोर्ट द्वारा लिए निर्णय का स्वागत किया है।
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हाईकोर्ट जिला अदालतों को तत्काल मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को तैयार है। आईके चतुर्वेदी ने बताया कि मुख्य न्यायमूर्ति ने सभी जिला जजों को यह निर्देश दिया है कि यदि उनके जिले मेें गर्मी के दिनों के अनुरूप सुविधाओं में कोई कमी है तो इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेंजे। सुविधाएं तत्काल मुहैया कराई जाएंगे।

बता दें कि मार्निंग कोर्ट समाप्त के निर्णय का विरोध करने की एक वजह यह भी है कि बुंदेलखंड और पूर्वी यूपी के तमाम जिलों की अदालतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। भीषण गर्मी में दिन के समय काम करने का वातावरण नहीं रहता है। कई जिलों में वकीलों को पेड़ के नीचे बैठकर काम करना पड़ता है। जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के अधिकांश जिलों में मार्निंग कोर्ट की व्यवस्था लागू थी।
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