कुंभनगर। कुंभनगरी में दाखिल होते ही जहां तरह-तरह के भजन और वेदऋचाएं आपको सुनाईं देंगी, वहीं परेड ग्राउंड में फूड कोर्ट के पास पहुंचते ही सुरों की धुन बदलने लगती है। यहां भजनों-ऋचाओं से इतर सदाबहार गीतों के साथ री-मिक्स का सुनने को मिल रहा है।
मेला क्षेत्र में प्रवेश करने पर प्रशासनिक और सरकारी विभागों के पांडाल हैं। वहां व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर काफी शोरशराबा है। इन्हीं के बीच भजनाें की धुन से पूरा माहौल राममय है। आगे बढ़ने पर सफेद रोशनी पर बसी तंबुओं की नगरी में हर तरफ संस्थाओं और साधु-संतों के शिविरों से निकलने वाली गुरुवाणी एवं ऋचाएं ज्ञान बांटने के साथ सुकून पहुंचाती हैं। इनके बीच खोया-पाया शिविर तथा आवागमन को लेकर होने वाले उद्घोष भी कुंभ नगरी का हिस्सा हैं। समाजशास्त्रियाें के अध्ययन और शोध में सिद्ध हो चुका है कि इनका वैज्ञानिक आधार भी है।
भक्तिमय माहौल के बीच आधुनिकता से युक्त बाबाओं के शिविर, सेल्फी प्वाइंट जैसे कुछ ऐसे नजारे भी हैं, जो मेला के बदलते स्वरूप को दर्शाने के साथ लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। परेड क्षेत्र के अंतर्गत महात्मा गांधी स्थित फूड कोर्ट का अंदाज कुछ खास ही है। यहां पर बदले सुर सुनने के बाद लोगों के पैर खुद ही थिरक जाते हैं। फूड कोर्ट में तरह-तरह के व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है। इसके बीच में सांस्कृतिक मंच भी सजा है, जहां लता, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी के सदाबहारों गीत सुनने को मिलेंगे। कलाकाराें से मनचाहे गीत की डिमांड भी की जा सकती है। इस मंच पर रीमिक्स का तड़का भी लगता है। ‘बिल्लो रानी कहो तो अभी जान दे दें’ की जगह ‘राधा रानी कहो तो अभी जान दे दें’ मेलोडी पर तो कलाकारों के साथ लोग भी थिरकने के लिए मजबूर हैं। रामधुन से इतर इस तरह के नजारे अरैल आदि स्थानों पर भी लोगों के आकर्षण बने हुए हैं।
लेकिन खलती है बेरुखी
0 फूड कोर्ट के बड़े हिस्से में लोग खुले आसमान के नीचे व्यंजनों और संगीत का आनंद उठाते हैं, लेकिन सांस्कृतिक मंच के ठीक सामने एक कोना ऐसा भी हैं जहां वाटर प्रूफ पांडाल बना है। ठंड और ओस से बचने के लिए वहां बैठने की कोशिश करते हैं, लेकिन बहुत ही बेरुखी से लोगों को हटा दिया जाता है। वहां बैठने के लिए चाय पीने की शर्त है, जिसकी कीमत 30 रुपये है।
शहर में भी लगे लाउडस्पीकर
0 मेला क्षेत्र को जाने वाले प्रमुख मार्ग भी रामधुन में रम चुके हैं। महात्मा गांधी मार्ग पर परेड से मेडिकल कालेज चौराहा, बालसन से इलाहाबाद विश्वविद्यालय आदि स्थानों पर लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। इन पर भजन आदि बजाए जा रहे हैं, जिससे शहर के इन हिस्सों का माहौल धार्मिक हो चुका है।