केंद्र निर्धारण में विश्वविद्यालयों की मनमानी पर लगाम
0 क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारियों को दी गई अहम जिम्मेदारी
0 नकल पर नकेल के लिए उच्च शिक्षा में नई व्यवस्था लागू
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। स्नातक, परास्नातक की परीक्षाओं के दौरान केंद्र निर्धारण में अब विश्वविद्यालयों की मनमानी नहीं चलेगी। नकल पर नकेल लगाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। केंद्र निर्धारण में अब क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारियों की सीधी दखल होगी और वह इस पूरी प्रक्रिया की मॉनीटरिंग करेंगे। यह जानकारी शनिवार को प्रयागराज आए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने दी। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।
पिछले साल परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने के लिए उच्चशिक्षा मंत्री ने प्रदेश स्तर पर मॉनीटरिंग सेल का गठन किया था। सेल के गठन के बाद नकल के कई बड़े मामले सामने आए और इस बात का खुलासा हुआ कि विश्वविद्यालयों ने मनमाने तरीके से केंद्रों का निर्धारण कर दिया था और इसी वजह से परीक्षा केंद्र बनाए गए ज्यादातर महाविद्यालयों में जमकर नकल हुई। इसी वजह से उच्च शिक्षा विभाग ने केंद्र निर्धारण में विश्वविद्यालयों के एकाधिकार पर लगाम लगाने का निर्णय लिया। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि इस बार स्नातक और परास्नातक की परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय सीधे अपने स्तर से केंद्र निर्धारण नहीं कर सकेंगे।
इसके लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारियों से भी अनुमति लेनी होगी। क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया में दखल दे सकेंगे। वह इस बात की मॉनीटरिंग भी करेंगे कि केंद्र निर्धारण के लिए जो मानक निर्धारित किए गए हैं, उनका पालन किया गया है या नहीं। समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. प्रीति गौतम, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद, सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. शैलेंद्र तिवारी, मॉनीटरिंग सेल के राज्य समन्वयक डॉ. इंदू प्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
विनियमित शिक्षकों को जल्द मिलेगा नियुक्ति पत्र
0 मानदेय शिक्षकों को तैनाती वाले स्थल पर ही विनियमित किए जाने की योजना
0 सॉफ्टेवयर भी तैयार, चयनित अभ्यर्थियों की जल्द होगी ऑनलाइन काउंसलिंग
प्रयागराज। प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में मानदेय पर तैनात शिक्षकों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद विनियमितीकरण के तहत जल्द ही नियुक्ति पत्र देने की तैयारी है। सबकुछ ठीक रहा तो 25 नवंबर तक मुख्यमंत्री खुद शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटेंगे। शनिवार को प्रयागराज आए उच्च शिक्षा मंत्री डॉॅ. दिनेश शर्मा ने सर्किट हाउस में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से असिस्टेेंट प्रोफेसर पद के लिए चयनित तकरीबन 1500 अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्हें तैनाती दी चुकी है। चयनित अभ्यर्थियों की अब ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू होने जा रही है। इसके लिए एनआईसी ने सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है। बाकी 315 चयनित अभ्यर्थियों को जल्द ही ऑनलाइन काउंसलिंग के तहत कॉलेज आवंटित कर दिए जाएंगे। इसके अलावा अशासकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त अविज्ञापित पदों पर तैनात 903 मानदेय शिक्षकों को विनियमित किया जा रहा है।
सबकुछ ठीक रहा तो इन सभी शिक्षकों को 25 नवंबर तक नियुक्ति पत्र दे दिया जाएगा। मंत्री ने उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक में यह भी कहा कि कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर का कोई अविज्ञापित पद रिक्त हैं और वहां मानदेय पर शिक्षक की तैनाती है तो संबंधित शिक्षक को उसी कॉलेज में विनियमितीकरण के तहत तैनाती दी जाए। मंत्री ने कहा कि तैनाती की प्रक्रिया में लालफीताशाही नहीं होनी चाहिए। सबकुछ पारदर्शी तरीके से हो और किसी को परेशान न किया जाए।
प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए शिथिल किए नियम
- प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए नियमों को शिथिल किया गया है। इसमें एपीआई स्कोर भी शामिल है, जिसमें घटाया गया है। उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। दरअसल, प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए जो मानक निर्धारित किए गए हैं, उसके अनुरूप अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में कई महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद खाली पड़े हुए हैं। इसी के मद्देनजर प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए नियमों को शिथिल किया गया है।
कॉलेज के लिए जमीन न मिलने का उठा मुद्दा
- प्रदेश सरकार ने मेजा में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया है लेकिन इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग को अब तक जमीन नहीं मिली। समीक्षा बैठक के दौरान उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. प्रीति गौतम ने यह मुद्दा उठाया और उच्च शिक्षामंत्री को बताया कि जमीन न मिलने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। इस पर उच्च शिक्षामंत्री ने आश्वासन दिया कि वह डीएम से बात करेंगे और प्रयास यही होगा कि जमीन जल्द मिले।