दुश्वारियों भर सफर होता है कांवरियों का
इलाहाबाद से वाराणसी तक के रास्ते में मुश्किलें अपार
अक्सर हादसे का शिकार हो जाते हैं कांवरिये
रास्ते में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं, मीलों नहीं मिलती स्ट्रीट लाइट
इलाहाबाद। प्रदेश सरकार ने कांवरियों के लिए रास्ते में मेडिकल समेत तमाम सुविधाएं देने की घोषणा जरूर की है लेकिन उनकी यात्रा मुश्किलों से भरी होती है। धूप में जलती हुई सड़कों पर नंगे पांव चलते लगातार दुश्वारियों से रूबरू होते हैं। उन्हें दिन में गर्मी तो रात में अंधेरे रास्ते परेशान करते हैं। बीच बीच में इधर उधर के ट्रैफिक से हादसे भी होते रहते हैं।
इलाहाबाद से वाराणसी तक के लगभग 120 किलोमीटर सफर में मुश्किलों की शुरूआत झूंसी पुल पार करते ही शुरू हो जाती है। प्रमुख बाजारों को छोड़ दिया जाय तो यहां से लेकर वाराणसी तक रात में उन्हें अंधेरे का सामना करना पड़ता है। झूंसी बाजार पार करते ही जो अंधेरा शुरू होता है, वह हनुमानगंज बाजार तक चलता रहा है। इसके बाद सैदाबाद, हंडिया, और बरौत आदि बाजारों में ही रात में लाइट मिलती है। स्वच्छ भारत अभियान कांवर यात्रा में दम तोड़ता नजर आता है। लाखों लोगों की भीड़ के लिए रास्ते में कही टायलेट और बाथरूम की व्यवस्था नहीं होती। उन्हें खेतों में जाना पड़ता है। कई बार किसानों से इसे लेकर उनकी झड़प भी हो जाती है। इतने लंबे रास्ते पर उन्हें अगर प्यास लग जाए तो बाजारों का ही सहारा मिलता है। कहीं कोई प्याऊ नहीं दिखता। वाराणसी मार्ग को पुलिस वन वे कर देती है लेकिन लोग छोटे रास्तों जिन्हें पुलिसिया भाषा में कट बोला जाता है, उससे राहगीर कांवरियों के रास्तों में घुस जाते हैं जिससे अक्सर छोटे बड़े हादसे हो जाते हैं। कभी कभी कांवरिये भी ट्रैफिक वाले रूट में चले जाते हैं। इस पूरे रास्ते पर ट्रैफिक मैनेज करने वाले सिपाही बहुत की कम संख्या में और दूर दूर होते हैं। फोर्स न होने के कारण अक्सर स्थानीय लोगों और कांवरियों के बीच बड़े बवाल भी हो जाते हैं।
--रास्ते में फोर्स पर्याप्त संख्या में लगाई जा रही है। वन वे ट्रैफिक का सख्ती से पालन किया जाएगा। जहां रास्तों पर कट है, वहां से ट्रैफिक कांवरियों के रास्ते में जा सकते हैं, ऐसे 70 स्थानों को चुनकर बेरीकेटिंग की जा रही है। आनंद कुलकर्णी, एसएसपी इलाहाबाद।