लीडर रोड पर रविवार को आखिरकार रिफ्यूजी मार्केट की 30 दुकानें प्रशासन, नगर निगम और एडीए के संयुक्त अभियान में ध्वस्त करा दी गईं। कुंभ के लिए हो रहे सड़क चौड़ीकरण की बाधा दूर करने के लिए की गई इस कार्रवाई में 75 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रभावित लोगों ने लाखों के नुकसान का आरोप लगाया है। सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक चली कार्रवाई के दौरान स्टेशन से जानसेनगंज चौराहे तक सड़क बैरीकेडिंग लगाकर सील की गई थी। मौके पर अफरातफरी मची रही।
सुबह छह बजे से ही जंक्शन स्टेशन के गेट नंबर चार से जानसेनगंज का रास्ता बंद कर दिया गया। वहां सिर्फ पुलिस और अफसरों के वाहनों के साथ जेसीबी, पोकलैंड मशीनें और डंपरों को जाने दिया जा रहा था। इलाके की बिजली काटने (शटडाउन) के बाद सुबह करीब सात बजे दो पोकलैंड और एक हाइड्रा मशीन से रिफ्यूजी मार्केट के ऊपरी तलों को ध्वस्त किया जाने लगा। इस दौरान रोते बिलखते लोगों ने विरोध जताने की कोशिश की तो उन्हें पुलिस ने बल का प्रयोग कर हटा दिया। फिर 7 जेसीबी मशीनें बिना रुके निर्माण तोड़ते रहीं। 11.30 बजे तक चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में रिफ्यूजी मार्केट का नामोनिशान मिटा दिया गया।
इसके बाद स्टेशन साइड पर सात भवनों का पोर्च खाली कराने के लिए कार्रवाई की गई। आंशिक भाग तोड़ने के बाद लोगों ने खुद निर्माण तोड़ने की गुहार लगाकर खुद को बड़े नुकसान से बचाया। शाम तक इन भवनों को हथौड़ों से तोड़ा जाता रहा। कार्रवाई के तुरंत बाद मौके से मलबा हटाया जाता रहा। पुष्पराज सिनेमा हाल के सामने ध्वस्तीकरण के दौरान पाइप क्षतिग्रस्त होने से जलभराव कार्य में बाधा बना। शाम सात बजे अंधेरा काम में बाधा बना तो कार्रवाई रोक दी गई।
बता दें कि लीडर रोड पर आजादी के बाद केंद्र सरकार के निर्देश पर बसाए गए रिफ्यूजी परिवारों को आवंटन के करीब 64 वर्ष बाद रविवार को उजाड़ दिया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद नगर निगम प्रशासन ने बुधवार को मुनादी कराकर कब्जेदारों को हटने की चेतावनी दी थी। शनिवार शाम से ही पुलिस के साथ निगम के अफसर मौके पर डटे रहे। लोगों को सामान हटाने के लिए कहा गया। अधिकांश ने सुबह तक सामान हटाया, लेकिन कुछ परिवार कार्रवाई शुरू होने के बाद ही वहां से हटे।
ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान एडीएम सिटी, नगर निगम के सभी जोनल अफसरों के साथ एडीए के प्रवर्तन दल प्रभारी आलोक कुमार पांडेय, अतिक्रमण प्रभारी लालमणि, निरीक्षक मनोज कुमार समेत इंजीनियरिंग अन्य विभागों के 150 से अधिक अफसर कर्मचारी मौजूद रहे। निगम कंट्रोल रूम में बैठे नगर आयुक्त अविनाश सिंह, अपर नगर आयुक्त ऋतु सुहास पल-पल की जानकारी लेती रहीं।
रिफ्यूजी मार्केट के ध्वस्तीकरण के दौरान स्टेशन रोड पर आवागमन में दिक्कत न हो इसलिए वहां से मलबा हटाने की तैयारी नगर निगम ने कर ली थी। कार्रवाई के दौरान ही वहां से लोडर डंपर फुल करते और ड्राइवर करेलाबाग स्थित वर्कशॉप की तरफ निकल जाते। दोपहर 12 बजे के बाद अचानक वाहनों की संख्या बढ़ा दी गई। कूड़ा ढोने वाले सभी बड़े वाहनों को लगा दिया गया। रात तक मलबा ढोने का काम जारी था। सोमवार सुबह से मलबा हटाया जाएगा। अफसरों का मानना है कि मौके पर करीब 300 गाड़ी से अधिक मलबा निकला, जिसमें 200 गाड़ी मलबा हटा दिया गया। अफसरों का मानना है कि अभी 30 फीसदी मलबा हटाया जाना है।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में 50 से अधिक वाहन और मशीनें लगाई गईं। इनमें सात जेसीबी, एक हाइड्रा मशीन, दो पोकलैंड मशीन, 20 ट्रकें और हाइवा, पांच ट्रैक्टर, दो रोबोट आदि शामिल रहे। नगर निगम अफसरों के मुताबिक रिफ्यूजी मार्केट के 90 फीसदी से अधिक मूल आवंटी अपनी जमीन दूसरों को बेचकर अन्यत्र चले गए। गिनती के दो से चार मूल आवंटी ही बचे होंगे। रोजगार के लिए दी गई जगह पर दो से चार मंजिला भवन बनाकर किराए पर उठा दिए गए। कई संपत्तियां ऐसी हैं, जो दो से चार बार तक री सेल की गईं। करीब चार महीने की जद्दोजहद में जब मार्केट के ध्वस्तीकरण की बात आती तो आवंटी मुआवजे की मांग करते, जिस पर अंत तक पेच फंसा रहा। यहां कार्य करा रहे एडीए के अफसरों ने नगर निगम को सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन खाली कराकर देने की हर बार बात कही, जो ध्वस्तीकरण के बगैर संभव नहीं था। माना जा रहा है कि कानूनी सलाह के बाद ही यह कार्रवाई की गई, जबकि प्रभावित परिवार इसे गलत बता रहे हैं।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान कोई हादसा न हो इसलिए संपूर्ण लीडर रोड की बिजली काट दी गई थी। नगर निगम के अनुरोध पर बिजली विभाग ने शटडाउन दिया था। शाम सात बजे तक इलाके की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी थी। इस कारण क्षेत्र के हजारों लोग दिन भर पानी के लिए परेशान रहे। कार्रवाई के दौरान स्टेशन रोड और आसपास की सभी दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। लोग चाय-पानी को भी भटकते रहे। शाम चार बजे तक तो कार्रवाई स्थल तक लोग पैदल भी नहीं पहुंच पाए। इसके बाद जो किसी तरह वहां से निकलने में सफल हुए, उन्हें लंबी दूरी पैदल ही तय करनी पड़ी। लोग सामान उठाए, सवारी तलाशते दिखे। दिन भर चौक या पानी टंकी के रास्तेे ही आवागमन किया गया।
रिफ्यूजी मार्केट को ध्वस्त करने के दौरान स्टेशन रोड पुलिस छावनी में तब्दील रही। आरएएफ के जवानों के साथ एनडीआरएफ की टुकड़ी भी मुस्तैद रही। पीएसी के साथ पुलिस के अफसर कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर डटे रहे। किसी को भी कार्रवाई स्थल तक नहीं जाने दिया गया। शाम छह बजे के बाद पैदल ही लोग वहां तक पहुंचे। इससे पहले कार्रवाई स्थल के दोनों तरफ तमाशबीनों की भारी भीड़ जमा रही। लोग मोबाइल से फोटो खींचते दिखे।