बता दें कि पहले चरण में प्रयागराज की तीन तहसील बारा, करछना और फूलपुर में 45 गांवों के किसानों से भूमि का अधिग्रहण होगा। परियोजना निदेशक पंकज मिश्रा के मुताबिक मुआवजे की शेष राशि भी अगले दो महीनों के भीतर सभी किसानों के खातों में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
रिंग रोड का 29.8 किमी का हिस्सा दांदूपुर (रीवा रोड) से शुरू होगा और 194 हेक्टेयर भूमि के क्षेत्र को कवर करते हुए सहसों (एनएच-19) स्थित टोल प्लाजा से जुड़ जाएगा। इस रिंग रोड के निर्माण के लिए गंगा पर अरैल (नैनी) से शुरू होकर अधवा (झूंसी) पर उतरने वाला 3.2 किमी लंबा छह लेन का पुल भी बनाया जाएगा। सरकार भूमि अधिग्रहण के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का मुआवजा देगी, जिसमें से लगभग 300 करोड़ रुपये निजी भूस्वामियों को दिए जाएंगे।
रोड इंजीनियरिंग के लिए बेहतर कंपनी की तलाश
एनएचएआई के क्षेत्रीय परियोजना निदेशक पंकज मिश्रा ने बताया कि आगामी महाकुंभ मेले को देखते हुए इनर रिंग रोड का निर्माण जुलाई से शुरू होगा। महकमे को रोड इंजीनियरिंग के लिए एक सही कंपनी की तलाश है। इसके लिए टेंडर डाल दिया गया है, लेकिन अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। प्रयास किए जा रहे हैं कि महाकुंभ से जुड़ी इस खास परियोजना को समय रहते पूरा करा लिया जाए। इस अहम प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद कानपुर होते हुए एमपी जाने वाले वाहनों को प्रयागराज में इंट्री नहीं करनी पड़ेगी। उधर, मध्य प्रदेश से कानपुर होते हुए वाराणसी जाने वालों लोगों को भी सुविधा होगी।
यह होगी सहूलियत
इनर रिंग रोड बनने से शहर के लोगों को जाम की समस्या से निजात मिलेगी। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के भारी वाहनों को आवागमन में सहूलियत होगी।