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गुप्त सेवा के नाम पर खर्च कर दिए 28.76 करोड़

Fri, 15 Jun 2018 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सीबीआई जांच में घिरे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पिछले छह वर्षों में आवंटित बजट का 92 फीसदी हिस्सा खर्च किया। तकरीबन हर वर्ष किसी न किसी मद में बजट का कुछ हिस्सा बचा रह गया, लेकिन गुप्त सेवा व्यय पर हर साल आवंटित बजट पूरा का पूरा खर्च किया गया है। यह रकम करोड़ों में है। आयोग ने यह जानकारी जनसूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत दी है, लेकिन गुप्त सेवा व्यय क्या है, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है।
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आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को यह सुराग पहले ही मिल चुका है कि तमाम परीक्षकों को आयोग के वाहनों से लाया और छोड़ा जाता था। परीक्षकों को नकद भुगतान किए जाने के साक्ष्य भी सीबीआई को मिले हैं। इन्हीं परीक्षकों से मॉडरेटर्स का काम लिया जाता था। जांच में यह बात भी साफ हो चुकी है कि पीसीएस-2015 में मॉडरेशन के नाम पर बड़ी गड़बड़ी हुई है और अंकों के साथ छेड़छाड़ की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि परीक्षकों पर आने वाला खर्च ही गुप्त सेवा व्यय तो नहीं है। फिलहाल, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि गुप्ता सेवा व्यय क्या है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अविनाश पांडेय ने आरटीआई के तहत वर्ष 2012-13 से वर्ष 2017-18 तक प्रत्येक साल आवंटित बजट और मदवार हुए व्यय का विवरण मांगा था।

आयोग की ओर से जो सूचना दी गई है, उसके मुताबिक पिछले छह वर्षों में आयोग को कुल तीन अरब 14 करोड़ 18 लाख रुपये बजट का आवंटन हुआ। आयोग ने इनमें से दो अरब 89 करोड़ तीन लाख रुपये खर्च किए। बजट के 25 करोड़ 15 लाख रुपये खर्च नहीं किए जा सके। मदवार दिए गए विवरण में गुप्त सेवा व्यय पर आयोग को बजट के रूप में 28 करोड़ 76 लाख रुपये आवंटित हुए और आयोग ने इस मद में पूरा बजट खर्च कर दिया। यानी आवंटित बजट का 9.15 फीसदी हिस्सा आयोग ने गुप्त सेवा के मद में खर्च किए।
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आयोग ने 29 प्रकार के मदों पर हुए खर्च की जानकारी दी है। इनमें वेतन, मजदूरी, महंगाई भत्ता, यात्रा व्यय, स्थानांतरण यात्रा भत्ता, अन्य भत्ते, मानदेय, कार्यालय व्यय, विद्युत देय, जलकर/जलप्रभार, लेख सामग्री एवं फॉर्मों की छपाई, कार्यालय फर्नीचर एवं उपकरण, टेलीफोन पर व्यय, कार्यालय प्रयोगार्थ स्टाफकारों/मोटरगाड़ियों का क्रय, गाड़ियों का अनुरक्षण एवं पेट्रोल आदि की खरीद, व्यवसायिक एवं विशेष सेवाओं के लिए भुगतान, किराया, उपशुल्क एवं कर स्वामित्व, विज्ञापन, बिक्री एवं विख्यापन व्यय, गुप्त सेवा व्यय, मशीनें एवं सज्जा/उपकरण और संयंत्र ओएमआर स्कैन मशीन, अनुरक्षण, अन्य व्यय, प्रशिक्षण के लिए यात्र एवं अन्य प्रासंगिक व्यय, अवकाश यात्रा भत्ता, कंप्यूटर हार्डवेयर/साफ्टवेयर का क्रय, कंप्यूटर अनुरक्षण/संबंधी स्टेशनरी का क्रय, चिकित्सा व्यय, वर्दी व्यय, पूंजी लेखा शामिल है। वर्ष 2017-18 के बजट में पुनरीक्षित वेतन के राजकीय अवशेष के रूप में 1.88 करोड़ मिले थे। हालांकि पूरा बजट बचा रह गया।
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वर्षवार व्यय का विवरण (करोड़ रुपये में)
वर्ष-आवंटित बजट-कुल व्यय-गुप्त सेवा व्यय
2012-13-30.93-30.93-1.69
2013-14-45.10-45.12-3.69
2014-15-54.04-53.41-3.69
2015-16-57.47-54.30-5.69
2016-17-62.77-48.14-5
2017-18-63.57-57.13-9
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