ये कठोर अनुशासन उनकी तपस्या और संकल्प की दृढ़ता को दर्शाते हैं। उनके संन्यास जीवन का एकमात्र उद्देश्य धर्म का प्रचार-प्रसार है। वे समाज को वैदिक ज्ञान, शास्त्रीय परंपराओं और पुराणों की महिमा से परिचित कराते हैं। उनका जीवन परंपरा, तपस्या और पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण है। ऐसे संन्यासियों की उपस्थिति से माघ मेले की आध्यात्मिक गरिमा और अधिक बढ़ जाती है तथा सनातन धर्म की अमर परंपरा जीवंत बनी रहती है।