राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्रयागराज में बच्चों के कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। ताजा आंकड़े योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहे हैं। दरअसल, एक स्वस्थ बच्चे का जन्म कराने में सरकार औसतन 30 हजार रुपये खर्च करती है। यह प्रक्रिया गर्भावस्था से शुरू होकर बच्चे के जन्म लेने और बाद में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में उपचार तक जारी रहती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क टीकाकरण भी इस प्रयास का हिस्सा है। इसके बावजूद जिले में 23,458 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। इनमें 20,752 मध्यम कुपोषित और 2,706 अति कुपोषित हैं। गांवों की तुलना में शहरी क्षेत्र में गंभीर कुपोषण के मामले अधिक हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि कई बच्चे जन्म से ही कमजोर हैं। इसके प्रमुख कारण गर्भावस्था के दौरान मां में खून की कमी होना, छह माह तक पर्याप्त स्तनपान न मिलना, संतुलित भोजन की कमी, बार-बार संक्रमण, कम वजन के साथ जन्म और पोषण संबंधी जागरूकता का अभाव माने गए। राष्ट्रीय पोषण अभियान, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की तमाम योजनाएं इन्हें स्वस्थ शरीर नहीं दे सकीं। संवाद
इतनी सेवाओं का मिलता है लाभ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच, आयरन-फोलिक एसिड का वितरण, टीकाकरण, आंगनबाड़ी से पूरक पोषाहार, स्तनपान परामर्श, नियमित स्वास्थ्य जांच, एनआरसी में भर्ती, इलाज और फॉलोअप जैसी सेवाएं शामिल हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के दायरे में बने हुए हैं।
मध्यम कुपोषित बच्चे
सिटी-1 में 1663, सिटी-2 में 1750, कोरांव में 1527, बहादुरपुर में 1486, उरुवा में 1361
अति कुपोषित बच्चे
सैदाबाद में 315, सिटी-2 में 251, उरुवा में 242, सिटी-1 में 199, कौंधियारा में 197
सभी चिह्नित बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक पोषाहार, स्वास्थ्य परीक्षण, वजन की निगरानी और जरूरत पड़ने पर बच्चों को एनआरसी भेजकर उपचार कराया जा रहा है। गर्भवती में एनीमिया कम करने और स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। -दिनेश सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
एक बच्चे पर इतना होता है खर्च
-गर्भावस्था में जांच, आयरन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं : 10,000 रुपये
- जन्म के बाद टीकाकरण, स्तनपान परामर्श और निगरानी : 3,000 रुपये
- आंगनबाड़ी से पूरक पोषाहार लगातार निर्धारित अवधि तक: 5000 रुपये
- एनआरसी में भर्ती, उपचार और फॉलोअप : 12,000 रुपये
- कुल अनुमानित खर्च : 30,000 रुपये प्रति बच्चा
तीन परिवारों के कुपोषित बच्चों की कहानी
-सैदाबाद ब्लॉक के रहने वाले परिवार का दो वर्षीय बच्चा मध्यम कुपोषित पाया गया। जांच में सामने आया कि जन्म के बाद पर्याप्त स्तनपान नहीं मिला। आर्थिक तंगी के कारण संतुलित भोजन भी उपलब्ध नहीं हो सका।
-सिटी-2 नगर क्षेत्र में रहने वाले परिवार की तीन वर्षीय बच्ची अति कुपोषित श्रेणी में मिली। चिकित्सकों ने कम वजन के साथ जन्म, बार-बार संक्रमण और भोजन में प्रोटीन की कमी को प्रमुख कारण बताया।
-बहादुरपुर ब्लॉक में रहने वाले परिवार का ढाई वर्षीय बच्चा गंभीर कुपोषण से ग्रस्त मिला। जांच में गर्भावस्था के दौरान मां में एनीमिया, परिवार में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी और समय पर स्वास्थ्य जांच न होने से स्थिति बिगड़ गई।