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Prayagraj News: 22 अफसरों ने की एक साल जांच, नतीजा शून्य

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जिले की करीब 120 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित 10 करोड़ रुपये से अधिक धन के गोलमाल का मामला सामने आया है। इन सभी मामलों में जांच बैठा दी गई है। इसमें 112 ग्राम पंचायतों की जांच अब भी लंबित है। जिले स्तर के 22 से अधिक अफसर एक वर्ष से अधिक समय जांच कर रहे हैं लेकिन नतीजा शून्य है।
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ग्राम प्रधान अब प्रशासक बन गए हैं। हर रोज 20 से अधिक ग्राम पंचायतों की लिखित शिकायतें डीपीआरओ, डीडीओ, सीडीओ और जिलाधिकारी तक पहुंच रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़कों, खड़ंजा, नाली, हैंडपंप रिबोर और शौचालय के निर्माण में हेराफेरी हुई है।
बिना कार्य कराए ही अलग-अलग फर्मों को भुगतान कर दिया गया। शिकायतों के बावजूद दोषियों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है और जांच की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।
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जांच अधिकारियों ने पाया कि कई ग्राम पंचायतों में मौके पर कोई कार्य नहीं हुआ जबकि एजेंसियों को इनका भुगतान किया गया है। ग्राम प्रधान और सचिव विकास कार्यों पर खर्च का हिसाब देने में मनमानी कर रहे हैं। वे बिल के नाम पर सादे कागज या एक ही बिल को कई मदों में अपलोड कर रहे हैं।


ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का दुरुपयोग

जिले के 23 विकास खंड में 1540 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें विकास कार्य करवाने की जिम्मेदारी प्रधान और पंचायत सचिव की होती है। शासन ने कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल लॉन्च किया है। पोर्टल पर आवश्यक अभिलेख अपलोड किए बिना भुगतान नहीं होता है। सचिवों ने इससे बचने के लिए नया तरीका खोजा है। कई पंचायतों ने अपलोड फाइल वाली जगह पर कोरा कागज लगाया है। कुछ ने एक ही बिल को कई मदों की फाइलों में अटैच किया है।
जांच में मिलीं कई अनियमितताएं

जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। हैंडपंप रिबोर का दावा कागजों में ही पाया गया लेकिन मौके पर हैंडपंप नहीं मिले। सीसी रोड निर्माण में भी गोलमाल हुआ जहां सचिव दस्तावेज नहीं दिखा सके। कुछ सड़कें मौके पर नहीं दिखीं जबकि उनका भुगतान हो चुका था। टेंडर प्रकाशन, कीटनाशक छिड़काव मशीन और शौचालय निर्माण संबंधी बिल वाउचर भी पेश नहीं किए गए। कई कार्य बिना कराए भुगतान करने का संदेह है।
आठ ग्राम पंचायत सचिवों पर हुई कार्रवाई
मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह के अनुसार, आरोपों की पुष्टि होने पर आठ ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अन्य भी कार्रवाई की जद में हैं। विभिन्न विभागों के 22 से अधिक अधिकारियों को कुल 112 ग्राम पंचायतों की जांच जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें से 10 की जांच पूरी होने वाली है।
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