सीएमपी में प्रवक्ता बनवाने का झांसा देकर 22 लाख हड़पे
प्रयागराज। सीएमपी डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता बनवाने का झांसा देकर जालसाजों ने कोचिंग संचालक से 22 लाख रुपये हड़प लिए। आरोपियों ने केपी ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष से नजदीकी का हवाला देकर ठगी की। भुक्तभोगी ने अतरसुइया थाने में धोखाधड़ी के आरोप में दो लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है।
अल्लापुर, बाघम्बरी हाउसिंग स्कीम निवासी प्रशांत मिश्रा की सिविल लाइंस एवं नैनी में कोचिंग है। उन्होंने पुलिस को बताया कि तेलियरगंज में फुटवियर की दुकान चलाने वाले अजय श्रीवास्तव, उसके भाई संजय श्रीवास्तव एवं पत्नी दिव्या से उनके घरेलू रिश्ते हैं। वर्ष 2017 में सीएमपी डिग्री कॉलेज में रसायन शास्त्र के प्रवक्ता के लिए चयन प्रक्रिया आरंभ होने पर उनकी पत्नी ने भी आवेदन किया। अजय ने तत्कालीन केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष राघवेंद्र नाथ सिंह से अपनी नजदीकी का झांसा देते हुए सिफारिश कराने की बात कही। प्रशांत का कहना है कि अजय ने राघवेंद्रनाथ की पत्नी के जरिए नियुक्ति करा देने की बात कहते हुए 25 लाख रुपये मांगे। बाद में अजय 22 लाख रुपये पर काम कराने को राजी हो गया।
एफआईआर के मुताबिक प्रशांत का कहना है उसने यह रकम अतरसुइया में चौधरी निवास के बाहर अजय को दी, हालांकि उसकी मुलाकात कभी भी चौधरी राघवेंद्रनाथ से नहीं कराई गई। कुछ समय बाद परिणाम आने पर उनकी पत्नी का चयन नहीं हुआ। इस पर उनको फर्जीवाड़े का अहसास हुआ। उन्होंने अजय से पैसा वापस करने के लिए दबाव बनाना शुरू किया। प्रशांत का कहना है आरोपियों ने तीन लाख रुपये वापस कर दिए, लेकिन 12 मई को फिर वह बकाया 18.80 लाख रुपये वापस मांगने उसके घर गए तब आरोपियों ने जान से मार डालने की धमकी देते हुए वहां से भगा दिया। भुक्तभोगी के मुताबिक फर्जीवाड़े की शिकायत उसने करीब छह माह पहले ही क्राइम ब्रांच अधिकारियों से की थी लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद रविवार को अतरसुइया पुलिस ने तहरीर के आधार पर अजय और संजय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। इंस्पेक्टर जेपी शर्मा के मुताबिक मामले की विवेचना शुरू करा दी गई है।
यह मामला मेरी जानकारी में भी आया है। नियुक्ति करने का काम एक कमेटी करती है। उसमें अध्यक्ष का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। आरोपी अजय एवं संजय श्रीवास्तव से राजनैतिक तौर पर परिचय है। यह लोग घर पर आकर किसी नियुक्ति को लेकर पैरवी कर रहे थे, लेकिन मैंने इंकार कर दिया था। मेरी पत्नी का नाम भी गलत तरीके से लिया जा रहा है। आरोपियों ने धोखाधड़ी की है, उनके खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
चौ. राघवेंद्रनाथ सिंह
पूर्व अध्यक्ष, कायस्थ पाठशाला