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जंक् शन पहुंचने में श्रद्धालुओं का छूटा पसीना

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कुंभ
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भीड़ नहीं, फिर भी लगवाए चक्कर
0 जंक्शन पहुंचने में बाहर से आए श्रद्धालुओं को छूटा पसीना
0 सिविल लाइंस साइड से प्रवेश न दिए जाने से लगाना पड़ा लंबा चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व भीड़ कम होने के बावजूद शहर में जगह-जगह श्रद्धालु रोके गए। जंक्शन पहुंचने के लिए भी श्रद्धालुओं को चक्कर लगाने पड़े। सिविल लाइंस साइड से रास्ता बंद होने की वजह से गंगा स्नान के बाद जंक्शन पहुंचे श्रद्धालुओं को रोक लिया गया। उन्हें सिटी साइड से जाने को कहा गया। तमाम बुजुर्गों ने आग्रह किया कि उन्हें अंदर जाने दिया जाए लेकिन, गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इस दौरान तमाम रेलकर्मियों को भी सिविल लाइंस साइड से प्रवेश के लिए मशक्कत करनी पड़ी, जबकि उनकी ड्यूटी जंक्शन पर ही थी।
कुंभ के सभी स्नान पर्व के एक दिन पहले एवं एक दिन बाद जंक्शन के सिविल लाइंस साइड से यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। सोमवार को संगम स्नान के बाद काफी संख्या में श्रद्धालु जंक्शन के सिविल लाइंस साइड पहुंच गए। इसमें महिला एवं बुजुर्ग लोगों की संख्या ज्यादा रही। थके हारे लोगों ने सिविल लाइंस साइड से प्रवेश करना चाहा, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।
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जबलपुर की बीना मलिक, राजेश्वर राय, नरसिंहपुर के श्याम जी चौबे आदि यात्रियों ने कहा कि शहर भले ही चमका दिया हो लेकिन, जिला प्रशासन की बदइंतजामी ने खासा परेशान किया। कहा कि अगर सिविल लाइंस साइड से प्रवेश नहीं देना था तो मेला क्षेत्र से उन्हें इस ओर क्यों आने दिया गया। इसी तरह अलीगढ़ के विपिन शर्मा, हाथरस के रामकृष्ण उपाध्याय ने भी सिविल लाइंस साइड से प्रवेश न दिए जाने पर नाराजगी जताई। कहा कि जब भीड़ नहीं है तो उन्हें क्यों रोका जा रहा है। उधर सोमवार को काफी संख्या में श्रद्धालुओं को सिविल लाइंस साइड से सिटी साइड की ओर जाने में तकरीबन तीन किलोमीटर अतिरिक्त चलना पड़ा।
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शहर में भी जगह-जगह रास्ते बंद होने से लोग हुए परेशान
प्रयागराज। मकर संक्रांति के पूर्व शहर की भी विभिन्न सड़कों को बंद कर लिए जाने से आम शहरियों को परेशानी हुई। पुराने शहर में अमूमन रास्ता बंद नहीं किया जाता, लेकिन सोमवार को सुलाकी चौराहा, कोठापार्चा डॉट के पुल के नीचे रास्ता बंद कर दिए जाने से लोग परेशान हुए। पूर्व पार्षद विजय वैश्य ने कहा कि तमाम शहरी अपने वाहनों से पुराने यमुना पुल के रास्ते अरैल में बनाई गई पार्किंग तक जाते हैं। वहां से संगम निकट होने की वजह से कुछ मिनट पैदल चलकर वे आसानी से स्नान कर लौटे आते हैं, लेकिन इस बार भीड़ न होने के बावजूद भी शहरियों को जगह-जगह रोका जाता रहा। अगर लोग स्नान करने ही नहीं जाएंगे तो कुंभ के लिए इतनी तैयारियों का क्या औचित्य। भाजपा नेता भी प्रशासनिक तैयारियों से खफा नजर आए। पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुबोध सिंह ने कहा कि सीएम ने एलान किया था कि श्रद्धालुओं को इस बार कम सेे कम चलना पड़ेगा, लेकिन मेला क्षेत्र में अफसरशाही हावी है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को दस से 15 किलोमीटर पहले ही रोक लिया गया। इस वजह से बिना गंगा नहाए ही तमाम लोग नाराज होकर वापस लौट गए।
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