अब परीक्षा केंद्रों की होगी जांच
यूपी बोर्ड: परीक्षा के केंद्र निर्धारण के लिए विद्यालयों से ली गई है ऑनलाइन सूचना
16 अगस्त से शुरू होगी जांच, गलत सूचना देने वाले विद्यालयों पर कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के केंद्र निर्धारण के लिए जिन राजकीय, सहायता प्राप्त तथा वित्त विहीन विद्यालयों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं, अब उनकी जांच शुरू होने जा रही है। जिले के ज्यादातर विद्यालयों ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के माध्यम से ऑनलाइन सूचना उपलब्ध करा दी है। अब डीआईओएस के नेतृत्व वाली टीम 16 अगस्त से इन विद्यालयों की जांच शुरू करेगी। इसके बाद रिपोर्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय को सौंपी जाएगी। फिर परीक्षा केंद्र का निर्धारण होगा।
जिले में यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त एक हजार से अधिक विद्यालय हैं। शहर में तो स्थिति कुछ हद तक ठीक है लेकिन ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर विद्यालय दो-चार कमरों में चल रहे हैं। कई विद्यालय ऐसे भी हैं जिनमें चहारदीवारी तक नहीं है। मेजा, करछना, हंडिया, फूलपुर, सोरांव आदि में ऐसे विद्यालय नकल के लिए भी बदनाम हैं। ऐसे विद्यालयों को परीक्षा की जिम्मेदारी न मिले इसके लिए बोर्ड ने आवेदन करने वाले स्कूलों से ऑनलाइन सूचना मांगी है। इसमें विद्यालय में कमरों की संख्या, परिसर की स्थिति, चहारदीवारी, सीसीटीवी कैमरे आदि की जानकारी उपलब्ध करानी है।
डीआईओएस आरएन विश्वकर्मा का कहना है कि जिले में तकरीबन सभी विद्यालयों ने ऑनलाइन सूचना उपलब्ध करा दी है। पांच विद्यालयों ने नोटिस जारी होने के बाद सूचना उपलब्ध कराई है। बताया कि काफी विद्यालय गलत सूचना देते हैं। परिसर में चहारदीवारी, सीसीटीवी कैमरा जैसे आवश्यक चीजें न होने के बावजूद ऑनलाइन सूचना में यह सभी हां में दर्ज किया जाता है। ऐसे में इन विद्यालयों का सत्यापन कराना आवश्यक है। विद्यालयों ने जो ऑनलाइन सूचना उपलब्ध कराई है, उसकी हार्डकापी निकाल ली गई है। इसके आधार पर सत्यापन का काम 16 अगस्त से शुरू होगा। इसमें जीआईसी, जीजीआईसी के प्रधानाचार्यों के साथ एडीआईओएस को भी लगाया जाएगा। जिन विद्यालयों की सूचना गलत होगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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मान्यता से कठिन केंद्र बनाना
इलाहाबाद। यूपी बोर्ड ने जिन विद्यालयों को पूरे वर्ष पढ़ाई के लिए मान्यता दी। अब उन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। विद्यालय में कितने कमरे हैं, विद्यार्थियों के खेलने के लिए मैदान है या नहीं, परिसर में चहारदीवारी बनी है या नहीं, मान्यता देते समय यूपी बोर्ड के अफसरों ने यह सब नहीं देखा जाता। जब बोर्ड परीक्षा की तैयारी होती है तो अफसरों को इसकी याद आती है। मान्यता देने के पहले ही इसका ध्यान दिया जाता तो शायद हर वर्ष एक माह तक चलने वाली परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण के लिए इतनी मशक्कत न करनी पड़ती। ऐसे में पहली कार्रवाई तो उन अफसरों के खिलाफ होनी चाहिए, जिनकी संस्तुति पर विद्यालयों को मान्यता दी गई है।