आयोग के लिए बड़ी चुनौती
बनी आरओ-एआरओ परीक्षा
0 लगातार गलत सवाल पूछ जाने से अगली परीक्षा को लेकर उहापोह
0 यूपीपीएससी की लापरवाही से दांव पर लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
गलत सवालों के कारण पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 का परिणाम संशोधित किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के लिए आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2017 का आयोजन बड़ी चुनौती होता जा रहा है। अभ्यर्थी भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि पिछली परीक्षाओं की तरह इस परीक्षा में भी गलत सवाल उनकी सफलता की राह में बाधा न बन जाएं।
पीसीएस, पीसीएस-जे, लोअर सबऑर्डिनेट, आरओ-एआरओ, एपीओ जैसी आयोग की बड़ी परीक्षाओं में गलत सवाल पूछ जाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। पिछली कई परीक्षाओं से गलत सवाल पूछे जाने का सिलसिला लगातार जारी है। हर बार मामला न्यायालय जाता है और परीक्षा से पूर्व आयोग के अफसर यही दावा करते हैं कि इस पर नए विशेषज्ञों की देखरेख में सवाल तैयार किए गए हैं। हाल ही में शासन की ओर से विशेषज्ञों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक में बढ़ोतरी भी की गई है, लेकिन कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 में आयोग की ओर से परीक्षा के बाद 10 गलत सवालों को हटाए जाने के बाद तीन अन्य प्रश्नों पर विवाद हुआ और अब हाईकोर्ट के आदेश पर आयोग को एक प्रश्न हटाना है और दो में संशोधन करना है।
इतनी बड़ी संख्या में सवाल गलत होने से अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। परिणाम संशोधित होने के बाद जो अभ्यर्थी मेरिट से बाहर होंगे, उनके लिए आयोग की एक गलती बड़ा झटका साबित होगी। अभ्यर्थी 19 जनवरी को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद दो माह से मुख्य परीक्षा के लिए रात-दिन तैयारी में जुटे हुए हैं। इनमें से जो अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट से बाहर होंगे, मुख्य परीक्षा में शामिल होने से पहले ही उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। आयोग की अगली बड़ी परीक्षा आरओ/एआरओ-2017 आठ अप्रैल को प्रस्तावित है। आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी में अभ्यर्थियों ने दिन-रात एक कर रखा है लेकिन उन्हें भी इस बात की आशंका सता रही है कि प्रश्न गलत हुए तो उनके भविष्य का क्या होगा।
कई स्तर पर मॉनीटरिंग के बावजूद गड़बड़ी
पीसीएस-2014 परीक्षा में गलत सवाल पूछ जाने का मामला भी न्यायालय गया था और तब आयोग ने हलफनामा देकर बताया था कि अंतिम उत्तरकुंजी जारी करने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत उत्तर पत्रकों की स्कैनिंग के बाद उत्तरकुंजी जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्ति प्राप्त किए जाने का प्रावधान है। जिन प्रश्नों पर आपत्तियां आती हैं, उनके समेत सभी प्रश्न-उत्तरों पर विशेषज्ञों की दो अलग-अलग कमेटियों से आख्या मांगी जाती है। अगर दोनों कमेटियों की आख्या में कोई अंतर है तो विशेषज्ञों की तीसरी कमेटी गठित किए जाने का प्रावधान है, लेकिन इस कमेटी में पूर्व की दोनों कमेटियों के किसी सदस्य को शामिल नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों की तीसरी कमेटी से विवादित प्रश्नों पर संस्तुति प्राप्त करने के बाद प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने के साथ अंतिम उत्तरकुंजी जारी किए जाने का प्रावधान है। जिस तरह परीक्षाओं में विवादित प्रश्न पूछे जाने के मामले सामने आ रहे हैं, उसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि आयोग निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर रहा है या नहीं। अगर प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है तो विशेषज्ञों के चयन पर सवाल उठते हैं। इतने विवादों के बाद भी आयोग ऐसे विशेषज्ञों का चयन क्यों करता है जो हर बार असफल साबित हो रहे हैं।