समायोजन प्रणाली से शिक्षक नाराज
नई प्रणाली में विद्यालयों में अप्रैल माह में छात्र-छात्रों की संख्या को बनाया गया है आधार
सीएम से समायोजन के लिए सितंबर माह की विद्यार्थियों की संख्या को मानक बनाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
सरकार की समायोजन प्रणाली को लेकर शिक्षकों की नाराजगी बढ़ गई है। इसके खिलाफ शिक्षक न्यायालय जाने की भी तैयारी में हैं। इसके पहले यूपीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष अनुराग सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग किया है कि समायोजन के लिए सितंबर माह की छात्र संख्या को मानक बनाया जाए, जिससे शिक्षा अधिकार अधिनियम का पूर्णत: पालन किया जा सके। साथ ही शिक्षकों का अहित भी न हो।
शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश सरकार प्राथमिक विद्यालयों एवं बच्चों की शिक्षा की भलाई के लिए जो कदम उठा रही है वह शिक्षक विरोधी हैं। समायोजन के नए आदेश से तकरीबन साढ़े पांच लाख शिक्षकों में आक्रोश है। शिक्षकों का इसका कारण भी गिनाया। बताया कि समायोजन का मानक अप्रैल माह की छात्र संख्या रखी गई है, जबकि अप्रैल में छात्रों की संख्या कम होती है, क्योंकि नया सत्र शुरू होता है। इसके बजाए जुलाई, अगस्त में सर्वाधिक प्रवेश होते हैं। इसी वजह से पूर्व में जितने भी समायोजन किए गए, सभी मानक 30 सितंबर की छात्र संख्या के आधार पर हुए। अप्रैल में छात्र संख्या कम होने पर शिक्षकों को अपने विद्यालय छोड़ने पड़ेंगे। इसके अलावा सबसे कनिष्ठ शिक्षक का समायोजन किया जाएगा, जिससे नवनियुक्त शिक्षकों एवं शिक्षा मित्रों पर ही प्रभाव पडे़गा, जबकि विद्यालय में छात्र संख्या कम होने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी वरिष्ठ शिक्षक की होनी चाहिए। पूर्व में भी समायोजन में सबसे ज्यादा ठहराव वाले शिक्षकों का समायोजन किया गया।
शिक्षकों का कहना है कि जल्द सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने वाला है। सरकार को इसका इंतजार करना चाहिए। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बढ़ावा देती है और जब बच्चे सरकारी विद्यालय छोड़कर चले जाते हैं तो शिक्षकों पर तलवार लटकायी जाती है।