पाकिस्तानी पनडुब्बी ने खुकरी पर किया फायर
इसके बाद आईएनएस खुकरी और आईएनस कृपाण को दुश्मन की पनडुब्बी के खतरे से निपटने के लिए भेजा गया। बताते हैं कि टोह लेने की क्षमता के कारण पाकिस्तानी पनडुब्बी हंगोर को खुखरी और कृपाण की गतिविधियों का पता चल गया। पाकिस्तानी पनडुब्बी ने निशाना साधकर खुकरी पर फायर किया। उस पर तैनात कैप्टन मुल्ला को मालूम पड़ा कि खुकरी में हमले से दो छेद हो चुके थे और पोत में तेजी से पानी भर रहा था।
जहाज को डूबता देख कैप्टन मुल्ला ने उसमें तैनात अफसरों और जवानों को समुद्र में कूदने को कहा। उन्होंने अपने दूसरे-इन-कमांड को लाइफबोट, राफ्ट और बोय को समुद्र में फेंकने का निर्देश दिया। कैप्टन मुल्ला ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना जहाज में तैनात तमाम साथियों के बचाव के इंतजामों की निगरानी की। जहाज डूबने के दौरान भी उन्होंने बचाव अभियान का निर्देशन जारी रखा और अपनी लाइफ जैकेट भी जहाज के बावर्ची को पहनाकर उसे भी पानी में धकेल दिया।
वह खुद आईएनएस खुकरी के क्वार्टर डेक पर खड़े होकर शहादत का इस्तकबाल करने लगे। बताया जाता है उस दौरान कैप्टन मुल्ला की वजह से कई लोगों को बचाया जा सका।
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला को उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए भारतीय नौसेना का पहला और देश का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार महावीर चक्र दिया गया।