00000000000000000
धनगर को अनुसूचित जाति में शामिल करने के शासनादेशों पर रोक
0 हाईकोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित जातियों को ही मिलेगा एससी-एसटी का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की धनगर जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए जारी 24 अक्तूबर 2003, 16 दिसंबर 2016 और 26 मार्च 2018 को जारी शासनादेशों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण का लाभ सिर्फ उन्हीं जातियों को मिलेगा, जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की गईं हैं। बलबीर सिंह और अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेशों को यह कहते हुए चुनौती दी गई है कि प्रदेश सरकार ने धनगर जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा दे दिया है, जबकि किसी जाति को अनुसूचित जाति या जनजाति का दर्जा देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। प्रेसिडेंसियल आर्डर मेें अधिसूचित जातियों की श्रेणी को उसी रूप में पढ़ा जाएगा, जिस रूप में वह अधिसूचित है। राज्य सरकार को इसे अपने हिसाब से पढ़ने या किसी जाति को जोड़ने का अधिकार नहीं है। याचिका में सुप्रीमकोर्ट के भइया लाल बनाम हरिकिशन सिंह और स्टेट ऑफ महाराष्ट्र बनाम मिलिंद व अन्य में पारित निर्णयों का भी आधार लिया गया। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस मामले में दो सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अगले आदेश तक उपरोक्त शासनादेशों के अमल पर रोक लगा दी है।