कानपुर के ध्यानार्थ
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आश्रम पद्धति कालेज चित्रकूट के संविदाकर्मियों को राहत
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने राजकीय आश्रम पद्धति कॉलेज चित्रकूट के संविदाकर्मियों को राहत देते हुए उनको सेवा से हटाने का आदेश रद्द कर दिया है। डीएम चित्रकूट ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि जब उपनिदेशक समाजकल्याण ने संविदाकर्मियों का कार्यकाल बढ़ा दिया तो तथ्यहीन शिकायत पर उनकी सेवा समाप्त करने का औचित्य नहीं है। कोर्ट ने डीएम से कहा कि वह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए नए सिरे से आदेश पारित करें। याचीगण ने काम किया है तो वह मानदेय पाने के हकदार हैं।
आशुतोष शुक्ल और 23 अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है। याचीगण का कहना था कि उनका चयन नियमानुसार हुआ है। एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर नवीनीकरण का आदेश दिया गया। इस बीच किसी ने शिकायत की कि याचीगण पद की योग्यता नहीं रखते हैं। इस शिकायत पर डीएम ने एक पक्षीय आदेश देते हुए उनकी नियुक्तियां रद्द कर दीं। कोर्ट ने कहा कि डीएम ने जांच करते समय याचीगण को सफाई देने का मौका नहीं दिया, इसलिए आदेश नैसर्गिक न्याय के विपरीत और रद्द होने योग्य है।