अपराध में बरी तो नियुक्ति पर करें पुनर्विचार
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी सेवा में चयनित अभ्यर्थी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज है और वह उसमें बरी हो गया है तो उसकी नियुक्ति पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। यह देखना चाहिए कि वह संदेह के लाभ में बरी हुआ है या बाइज्जत बरी किया गया है। कोर्ट ने पुलिस उपनिरीक्षक के पद पर चयनित विजय सिंह यादव को आपराधिक मुकदमे के आधार पर नियुक्ति न देने के मामले में सुप्रीमकोर्ट के अवतार सिंह केस के आधार पर याची की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया। अवतार सिंह केस में सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि मुकदमे से बरी होने की स्थिति में अभ्यर्थी की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
फर्रुखाबाद के विजय सिंह यादव की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया है। याची का कहना था कि 2015 की पुलिस भर्ती में वह चयनित हुआ था। किंतु उसे नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। उसके खिलाफ कायमगंज पुलिस स्टेशन में दो आपराधिक मामले लंबित हैं। याची का कहना था कि वह इन दोनों मामलों में बरी हो चुका है। इसलिए उसने फार्म भरते समय जानकारी नहीं दी। याची का कहना था कि अवतार सिंह केस के मुताबिक बरी होने के बाद उसे नियुक्ति पाने और प्रशिक्षण पर जाने का अधिकार है। कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड को इस आधार पर दो माह में निर्णय लेने के लिए कहा है।