00000000000000000000
नेत्रहीन लालाराम को एमपी से खींच लाया कुंभ
0 तुलसी एक्सप्रेस से उतरने के बाद लोगों से पूछता रहा संगम का रास्ता
0 रेलवे अफसर ने करवाया नाश्ता तो ई रिक्शे वाला फ्री में ले गया मेला क्षेत्र
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। कुंभ मेले की रंग बिरंगी दुनिया लालाराम भले ही न देख सके लेकिन उन्हें यह बात मालूम है कि प्रयागराज का कुंभ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। उन्होंने गंगा को भी नहीं देखा है लेकिन पुण्य की डुबकी की कामना हमेशा से उनके मन में रही। यही कारण है कि वह मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले से अकेले ही प्रयागराज आ पहुंचे। संगम में डुबकी लगाने के लिए लालाराम सोमवार की सुबह इलाहाबाद जंक्शन पर उतरे तो संगम का रास्ता पूछते-पूछते वह सिविल लाइंस साइड के मुख्य गेट तक पहुंच गए।
यहां लालाराम ने तमाम लोगों से संगम जाने वाली बस में बैठने के लिए मदद मांगी। इस बीच एनसीआर के एक वरिष्ठ अफसर डा. अमित मालवीय की निगाह उन पर पड़ी। पूछा तो लालाराम ने खुद के बारे में बताया। यह भी कि वह यहां क्यों और कैसे आए हैं। बताया कि वह तुलसी एक्सप्रेस से अकेले ही प्रयागराज पहुंचे। अब संगम में डुबकी लगाने के बाद ही वापस लौटेंगे। अकेले आने की वजह पूछी तो लालाराम ने कहा कि वह 12 वर्ष पूर्व भी कुंभ मेले में आ चुके हैं। तब भी वह अकेले ही आए थे। कहा कि वह भले ही नेत्रहीन हैं, लेकिन लोगों की मदद से वह अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। उज्जैन में लगे सिंहस्थ कुंभ के दौरान क्षिप्रा नदी में डुबकी लगाने की बात लालाराम ने कही। बताया कि भाई किसान है। उसी के साथ अशोक नगर में रहते हैं। बाद में डा. मालवीय ने उन्हें नाश्ता करवाकर ई रिक्शे में संगम के लिए बैठा दिया। ई रिक्शे वाले ने भी इंसानियत दिखाई। कहा कि वह लालाराम से किराया नहीं लेगा।