जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने तय किए एक लाख मुकदमे
0 12 वर्ष के कार्यकाल में छुआ जादूई आंकड़ा, रामजन्म भूमि विवाद, ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य विवाद सहित कई चर्चित मुकदमों में दिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
रामजन्म भूमि विवाद और ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य पीठ विवाद जैसे मुद्दों पर फैसला देने वाले जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। उन्होंने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल में एक लाख मुकदमों का निस्तारण कर रिकार्ड कायम कर दिया। उनसे पहले अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह भी 11 वर्ष के कार्यकाल में एक लाख 37 हजार मुकदमों के निस्तारण का रिकार्ड बना चुके हैं।
जस्टिस अग्रवाल ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रथम अपील, आयकर और संपत्ति कर के मुकदमे, क्रिमिनल और सिविल रिवीजन, द्वितीय अपील के अलावा बड़ी संख्या में जनहित याचिकाओं पर भी चर्चित फैसले दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अधिकारियों और राजनीतिज्ञों को अपने बच्चे पढ़ाने का आदेश दिया। जस्टिस अग्रवाल ने उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए बिजली पाने के अधिकार को जीवन जीने के अधिकार का हिस्सा करार दिया था। 40 वर्षों से चले आ रहे रामजन्म भूमि-बाबरी मजिस्द विवाद पर उनका निर्णय सबसे चर्चित रहा। इस विवाद पर उन्होंने लगातार दो वर्षों तक सुनवाई की और करीब एक हजार पेज का निर्णय दिया।
जस्टिस अग्रवाल न्यायिक अनुशासन को लेकर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय प्रशासन को कड़े आदेश दिए। उनकी उपलब्धि पर अधिवक्ताओं ने बधाई दी। न्यायमूर्ति अग्रवाल अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने स्टाफ मेंबर्स को देते हैं। कहते हैं उनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। जस्टिस अग्रवाल के प्रमुख निजी सचिव एके नायक, पुनीत श्रीवास्तव, अवधेश, योगेंद्र सिंह, कुशल और अन्य सदस्यों ने फैसले तैयार करवाने में हमेशा कड़ी मेहनत की है।