डॉक्टरों ने काली पट्टी बांध किया विरोध
केंद्र सरकार को दी हड़ताल की चेतावनी, बगैर संशोधन तीन बिलों पर जताई नाराजगी
आईएमए ने कहा- डॉक्टरों के पेशे को दागी कहना बंद करे सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। डॉक्टरों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए काला फीता बांधकर काम किया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर एएमए ने शुक्रवार को नए सभागार में सभा की। डॉक्टरों ने कहा कि नई व्यवस्था लागू हुई तो देश में चिकित्सीय शिक्षा और इलाज की व्यवस्था महंगी हो जाएगी। डॉक्टरों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि बगैर संशोधन नेशनल मेडिकल कमीशन सहित अन्य दोनों बिलों को सदन में रखा गया तो डॉक्टर हड़ताल पर को मजबूर होंगे। इस संबंध में ज्ञापन भी आईएमको के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया।
देश भर के डॉक्टर नेशनल मेडिकल बिल, कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल और आईएमसी बिल के मसौदे में संशोधन की मांग कर रहे हैं। विरोध दिवस मना रहे आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा कि सरकार चिकित्सीय पेशे को दागी कहकर बदनाम करना बंद करें। एक या दो लोगों पर आरोप लगने का मतलब ये नहीं कि चिकित्सीय पेशा ही भ्रष्टाचार में डूबा है।
डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने कहा कि इन तीन बिलों के पारित होने से क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर और छोटे नर्सिंग होम संचालक प्रभावित होंगे। कॉरपोरेट सेक्टर का मेडिकल क्षेत्र में आधिपत्य होगा। डॉ. युगांतर पांडेय ने इन बिलों को डॉक्टर और मरीज के संबंध में दरार डालने वाला बताया। डॉ. एसकेएस चौहान और डॉ. सुजीत सिंह ने कहा कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे। मरीजों को महंगा इलाज मिलेगा। डॉ. बीके मिश्रा ने कहा कि इससे चिकित्सकीय पेशा प्रभावित होगा। अफसरशाही को बढ़ावा मिलेगा। चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार बढे़गा। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को काफी नुकसान होगा।
विरोध प्रदर्शन में सरकारी चिकि त्सकों की भूमिका न के बराबर रही। सभा में डॉ. राधारानी घोष, डॉ. राजेश मौर्या, डॉ. आशुतोष गुप्ता, डॉ. अनूप चौहान, डॉ. सुभाष वर्मा,डॉ. अभिनव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।