मुरादाबाद के ध्यानार्थ
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चार हजार रुपये के लिए कत्ल में उम्रकैद बरकरार
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने चार हजार रुपये के लिए हत्या करने के आरोपी रामपुर के शिवराज को मिली उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। अभियुक्त की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सत्र न्यायालय के फैसले में कोई दोष नहीं है। अपील पर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने सुनवाई की।
घटना लगभग 35 साल पुरानी 1983 की है। नौ सितंबर 1983 को सुबह आठ बजे केहर सिंह अपने 17 वर्षीय बेटे पप्पू के साथ पंजाब नगर गांव से विजैया गांव गया था। तभी शिवराज अपने साथियों को वहां लेकर पहुंचा और केहर सिंह को तमंचे से गोली मार दी। गोली उसके सिर में लगी, जिससे मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना को केहर सिंह के पुत्र के अलावा विजैया गांव के दो और लोगों ने देखा था। मृतक और शिवराज के बीच चार हजार रुपये के लेनदेन का विवाद था। केहर सिंह ने रुपये दूने करने के नाम पर शिवराज से चार हजार रुपयेे लिए थे, जिसे वह लौटा नहीं रहा था। कुछ दिन पूर्व भी इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हुआ था। कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों से आरोपी पर दोष साबित होता है, इसलिए उम्रकैद की सजा देना सही निर्णय है।