हजारों की भीड़ में होगी संदिग्ध की पहचान
0 आंख खराब होने से पहले ही पकड़ ली जाएगी बीमारी
0 इविवि में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शोधों पर मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हजारों की भीड़ में किसी संदिग्ध की पहचान अब आसानी से की जा सकेगी। यह शोध इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जेके इंस्टीट्यूट के कुछ शिक्षकों और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने मिलकर किया है। सुरक्षा की दृष्टि से यह शोध काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेके इंस्टीट्यूट में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को ऐसे ही कई प्रमुख शोधों पर मंथन किया गया।
भारत और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम में शामिल रहे जेके इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश ने ‘पर्सन री-आईडेंटीफिकेशन’ पर पेपर प्रस्तुत करते हुए बताया कि शोध के तहत तैयार किए गए सॉफ्टवेयर के जरिये किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हजारों की भीड़ में आसानी से की जा सकेगी। कोई व्यक्ति भीड़ में एक बार से अधिक शामिल होता है तो वह आसानी से चिह्नित हो जाएगा। मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय गोरखपुर की प्रतिमा यादव ने एक शोध पर चर्चा करते हुए बताया कि आंखों की समस्याओं को पूर्व ही पहचाना जा सकेगा। आंख खराब होने वाली है तो एक मामूली से टेस्ट के जरिये इसकी पहचान हो जाएगी और इस सावधानी से मरीज को वक्त रहते उचित इलाज मिल जाएगा।
सम्मेलन में सीएसआईआर पिलानी के साइंटिस्ट प्रो. एसएन जोशी ने तेज तरंग के उपकरण गयरोट्रोन के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा एमटीएनएल के अनुज के. श्रीवास्तव, एमएमएम विश्वविद्यालय गोरखपुर के प्रो. एनपी सिंह, आईआईटी दिल्ली के प्रो. एसएमके रहमान, आईआईटी बीएचयू के प्रो. एके सिंह, आईआईटी पटना के प्रो. महेश ने कंप्यूटर विज्ञान से जुड़े आधुनिक शोधों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान ट्रिपल आईटी के डॉ. शिशु वर्मा, एमएनएनआईटी के प्रो. एमएम गोरे, शुआट्स के डॉ. राघव यादव, डॉ. तनवीर, वित्त अधिकारी प्रो. एनके शुक्ला, डीन साइंस प्रो. आरआर तिवारी, विभागाध्यक्ष प्रो. नरसिंह आदि मौजूद रहे।