राजस्व अदालतों के लिए अलग कैडर बनाने का निर्देश
0 हाईकोर्ट ने पूछा कब तक हो जाएगी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने एक बार फिर राजस्व अदालतों के लिए अलग न्यायिक कैडर बनाने का प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व से पूछा है कि अलग कैडर का गठन कर न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करने में कितना वक्त लगेगा। इससे पूर्व कोर्ट ने एक मार्च 2016 को यशपाल सिंह केस में अलग राजस्व कैडर बनाने का निर्देश दिया था, मगर उस आदेश का पालन नहीं हो सका। कोर्ट ने इस बार प्रमुख सचिव से हलफनामा मांगा है, साथ ही अध्यक्ष राजस्व परिषद से पूछा है कि नायब तहसीलदार से लेकर राजस्व परिषद तक राजस्व के कुल कितने मुकदमे लंबित हैं। उनका ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
गोरखपुर के नथुनी प्रसाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया। याचिका पर गोरखपुर के आयुक्त अनिल कुमार ने कोर्ट के आदेश पर हलफनामा दाखिल कर बताया कि 1969 से 2017 तक राजस्व के लाखों वाद लंबित हैं। इनके निस्तारण की गति काफी धीमी है। कोर्ट ने कहा कि न्याय देने में देरी का मतलब मानवाधिकार का हनन भी है। राजस्व न्यायालयों में भी अन्य न्यायालयों की तरह अलग कैडर बनाकर न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की जानी चाहिए ताकि मुकदमों के निस्तारण में तेजी आ सके। मौजूदा समय में राजस्व न्यायालयों के अधिकारी प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के कारण मुकदमों के निस्तारण में समय नहीं दे पाते हैं। वकीलों की हड़ताल के कारण भी इसमें देरी होती है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में अलग कैडर तय किया गया है। जब तक इसका पालन नहीं होता है लोगों को राजस्व अदालतों में समय पर न्याय नहीं मिल सकेेगा। कोर्ट ने गोरखपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि सुप्रीमकोर्ट की रोक के बावजूद हड़ताल क्योें की गई।