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सरकारी वकीलों के पैनल पर पुनर्विचार कर रही है सरकार

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सरकारी वकीलों की सूची पर पुनर्विचार करेगी सरकार
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0 महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट में दी जानकारी
0 नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टली
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार के मुकदमों की पैरवी के लिए हाल ही में गठित पैनल पर प्रदेश सरकार पुनर्विचार कर रही है। पैनल के गठन में नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है। इसे लेकर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर गुरुवार को महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार पैनल पर स्वयं पुनर्विचार कर रही है, इसलिए कुछ और समय दिया जाए। उनकी मांग पर कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए आठ अगस्त की तिथि नियत कर दी है।
याचिका में कहा गया है कि राज्य विधि अधिकारियों की सूची बनाते समय सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। सरकारी वकीलों की नियुक्ति बिना प्रक्रिया का पालन किए की गई है। जबकि मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कहा था कि भविष्य में की जाने वाली नियुक्तियों में गाइड लाइन और प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इसके बावजूद पैनल में कई ऐसे वकील शामिल किए गए हैं जो व्यवसायिक अनुभव नहीं रखते हैं। अयोग्य लोगों को पैनल में शामिल करने से सरकार के मुकदमों का पक्ष रखने में कठिनाई आ रही है।
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प्रदेश सरकार ने सात जुलाई को लगभग 500 सरकारी वकीलों के पैनल की सूची जारी की थी। इसके साथ ही सपा सरकार द्वारा बनाए गए सभी सरकारी वकीलों को एक साथ हटा दिया गया। समूचे पैनल में फेरबदल होने और नया पैनल बनने के बाद से ही इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है अनुभवहीन लोगों को पैनल में शामिल करने की वजह से अदालत में सरकार का पक्ष रखने में कठिनाई आ रही है।
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सहयोग न मिलने से अदालतें नाराज
नवनियुक्त सरकारी वकीलों से समुचित सहयोग न मिल पाने पर गत दिनों मुख्य न्यायाधीश ने भी महाधिवक्ता को तलब कर कम से कम एक अपर महाधिवक्ता की उनकी कोर्ट में तैनाती करने के लिए कहा था। अन्य अदालतें भी सरकारी वकीलों की ओर से सहयोग न मिल पाने पर नाराजगी जता चुकी हैं। न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सभी अपर महाधिवक्ताओं को अपनी कोर्ट में तलब कर वर्तमान स्थिति पर नाराजगी जताई थी। यह भी कहा जा रहा है पुराने सभी वकीलों को एक साथ हटाने से यह दिक्कत आई है। पूर्व की सरकारें किश्तों में पैनल बदलती थी।
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