रोड शो को अनुमति नहीं लेकिन सपा ने दिखाई ताकत
0 नामांकन के लिए सैकड़ों समर्थकों संग पहुंचे दोनों सीट के प्रत्याशी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद और फूलपुर संसदीय सीट के लिए सपा के दोनों प्रत्याशियों ने मंगलवार को दूसरे दिन भी नामांकन किया। उनके रोड शो और सभा को प्रशासन से अनुमति नहीं थी। हालांकि अघोषित तौर पर कार्यकर्ताओं ने ताकत दिखाई। पार्टी कार्यालय पर तो कार्यकर्ताओं का जमावड़ा हुआ ही, नामांकन के दौरान कलेक्ट्रेट के सामने भी बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। इससे कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास जाम की स्थिति रही।
फूलपुर के सपा उम्मीदवार पंधारी यादव और इलाहाबाद के राजेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार को नामांकन किया था। दोनों प्रत्याशियों ने मंगलवार को भी नामांकन किया। नामांकन से पहले जार्जटाउन स्थित पार्टी कार्यालय पर सांसद नागेंद्र सिंह पटेल, विधायक उज्ज्वल रमण सिंह, संग्राम सिंह यादव, एमएलसी रामवृक्ष यादव, वासुदेव यादव, प्रदेश प्रवक्ता केके श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव, महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तिखार हुसैन, दान बहादुर समेत कई वरिष्ठ नेताओं के साथ सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा हुआ। नेताओं ने महागठबंधन के प्रत्याशियों की जीत का दावा किया। इसके बाद वे नामांकन के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके साथ सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता भी पहुंचे। वे पूरे रास्ते नारेबाजी करते हुए चल रहे थे। इसकी वजह से जगह-जगह जाम की स्थिति रही। नामांकन के बाद राजेंद्र सिंह और पंधारी यादव का कहना था कि उन्हें हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है।
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सपा कार्यकर्ताओं के सामने बेमानी हुई बेरिकेडिंग
0 सपा प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था तथा आचार संहिता को लेकर भी सवाल उठे। कार्यकर्ता बेरिकेडिंग पार करके कलेक्ट्रेट परिसर के गेट तक पहुंच गए। फोर्स ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें हटाया लेकिन, कार्यकर्ता फिर पहुंच गए। यह क्रम कई बार चला। नामांकन करके जब दोनों प्रत्याशी बाहर निकले तो युवा कार्यकर्ता दौड़ लगाते और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट के गेट तक पहुंच गए। उन्होंने परिसर में जाने की भी कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें रोका। इस दौरान उनकी अफसरों तथा पुलिस से कई बार झड़प भी हुई। इसमें डिवाइडर पर लगा टिन भी एक जगह से उखड़ गया। एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है कि परिसर के भीतर सिर्फ पांच लोगों को ही प्रवेश दिया गया। 200 मीटर की परिधि के बाहर समर्थक आ सकते हैं। फिर भी कलेक्ट्रे परिसर की बाहर की हर गतिविधि की वीडियोग्राफी कराई गई है। उसने देखने के बाद निर्णय लिया जाएगा।