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झुका इविवि प्रशासन, बढ़ी फीस वापस

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झुका इविवि प्रशासन, बढ़ी फीस वापस
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विधि विभाग में कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया निर्णय
बैठक में शामिल हुए अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, महाविद्यालयों के प्राचार्य
इलाहाबाद। छात्रों और छात्र नेताओं के भारी विरोध के कारण आखिरकार इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन को फीस बढ़ोतरी का फैसला माहभर बाद ही वापस लेना पड़ गया। यूजीएटी, पीजीएटी, क्रेट में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के पहले विवि प्रशासन के फीस बढ़ोतरी के फैसले पर बैकफुट पर आने को छात्र की जीत माना जा रहा है। मंगलवार को विवि के सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष एवं संबंद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक में इसके साथ क्रेट को छोड़कर सभी प्रवेश परीक्षाओं के कटऑफ प्राप्ताकों को कम करने का भी निर्णय लिया गया।
प्रवेश समिति की ओर से 18 मई को प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के संबंध में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में निदेशक ने सालाना फीस में 2051 रुपये की बढ़ोतरी की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि पिछले सत्र तक 924 रुपये फीस ली जा रही थी जो सत्र 2017-18 में बढ़ाकर 2975 रुपये ली जाएगी। उन्होंने फीस बढ़ोतरी का कारण भी स्पष्ट किया था। बताया था कि विवि के गृहकर समेत अन्य खर्चों में इजाफा हो रहा है। साथ ही सातवां वेतन आयोग लागू करने के लिए 30 फीसदी रकम की व्यवस्था करने के लिए यह निर्णय लिया गया लेकिन मंगलवार को कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू की अध्यक्षता में विधि विभाग में हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि आगामी शैक्षिक सत्र में शुल्क वृद्धि नहीं हो रही है। पूर्व में भी शुल्क वृद्धि की कोई घोषणा नहीं की गई थी।
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कम हुआ कटऑफ मार्क्स
बैठक में क्रेट को छोड़कर सभी प्रवेश परीक्षाओं के कटऑफ मार्क्स को कम करते हुए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 20 प्रतिशत, ओबीसी वर्ग के लिए 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया। पूर्व में यह कटऑफ सामान्य वर्ग के लिए 30 प्रतिशत तथा ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत था। अनुसूचित जाति एवं जन जाति वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कटऑफ पूर्ववत शून्य प्रतिशत ही है। बैठक में साफ किया गया कि यह निर्णय केवल सत्र 2017-18 केलिए ही मान्य होगा। कटऑफ का यह प्रावधान दिव्यांग, खेलकूद एवं कर्मचारी कोटे के अभ्यर्थियों पर लागू नहीं होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि तकरीबन 14 हजार सीटें होने के बावजूद कटऑफ मार्क्स लागू होने से सिर्फ 8800 विद्यार्थी प्रवेश लेने के लिए अर्ह हुए हैं। कटऑफ में संशोधन के बाद अब ज्यादा विद्यार्थियों को प्रवेश का मौका मिलेगा।
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बीमा लाभ से वंचित हो सकते हैं विद्यार्थी
फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस होने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी बीमा के लाभ से वंचित हो सकते हैं। विवि प्रशासन ने इस सत्र से छात्र-छात्राओं का बीमा कराने की भी योजना बनाई थी। बढ़ी फीस में बीमा प्रीमियम शुल्क भी निर्धारित किया गया था लेकिन अब यह फैसला वापस होने के बाद बीमा को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वैसे विवि प्रशासन ने विद्यार्थियों के बीमा कराने की योजना काफी पहले से बना रखी थी।
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खुशियां मनाई, बंटी मिठाई
इलाहाबाद। विवि प्रशासन की ओर से फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने पर छात्रों ने परिसर में मिठाई बांटी और अबीर उड़ाकर खुशियां मनाई। विवि छात्रों ने क्रमिक अनशन के बीच मंगलवार को विधि विभाग में चल रही बैठक में पहुंचकर मांगों के ज्ञापन के साथ हाथ में कटोरा लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद छात्र कुलपति कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। यहां चीफ प्रॉक्टर एवं डीएसडब्ल्यू ने छात्रों को फीस वृद्धि वापस लेने और न्यूनतम अर्हता समाप्त करने के निर्णय से अवगत कराया। इसमें एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव विवेकानंद पाठक, विकास तिवारी, छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा, उपाध्यक्ष अदिल हमजा, आनंद सिंह, अजीत यादव आदि शामिल थे। बाद में छात्रों ने हॉस्टल में फीस बढ़ोतरी एवं रूम रेंट कंट्रोल एक्ट के मुद्दे पर अनशन जारी रखने का निर्णय लिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में विवि प्रशासन के इस फैसले के बाद परिसर में मिठाई बांटकर एवं अबीर गुलाब उड़ाकर खुशियां मनाईं। इसमें छात्रसंघ अध्यक्ष समेत विक्रांत सिंह, नीरज सिंह, अनुराग, देवेश, हेमंत, भोले आदि शामिल थे। उधर, फीस वृद्धि विरोधी मोर्चा के नेतृत्व में छात्रों ने छात्रसंघ भवन से कुलपति कार्यालय तक जुलूस निकाला। इस दौरान तीन सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा गया। इस बीच चीफ प्रॉक्टर ने छात्रों को विवि प्रशासन के निर्णय से अवगत कराया। इसमें रामचंद्र, भीम सिंह चंदेल, शक्ति, सुजीत, रत्नेश, महाप्रसाद, कृष्णा आदि शामिल थे।
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